अफ़ग़ानिस्तान से फ़ौज वापसी पर बहस तेज़ हुई

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अफ़गानिस्तान में तैनात फ़ौज में कटौती की संख्या पर अमरीका में पर्दे के पीछे की बहस और अटकलबाज़ी दोनों ही तेज़ हो गई है.

जहां राष्ट्रपति ओबामा की डेमोक्रैट पार्टी के सांसद एक ठोस कटौती के लिए उतावले हैं, वहीं सेना के अधिकारी किसी भी ऐसी कटौती के ख़िलाफ़ हैं जिससे अभी तक मिली बढ़त हाथ से निकल जाए.

लियोन पनेटा, जिनकी रक्षा मंत्री पद पर नियुक्ति को कुछ ही दिनों में संसद की हरी झंडी मिल जाने की संभावना है, चाहते हैं कि कोई भी कटौती “ज़िम्मेदाराना” हो.

पनेटा इस समय अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के प्रमुख हैं और राष्ट्रपति ओबामा ने उन्हें नए रक्षा मंत्री के पद के लिए चुना है. उनकी नियुक्ति को सेनेट की मंज़ूरी मिलनी बाकी है लेकिन अंदाज़ा है कि उसमें कोई अड़चन नहीं आएगी.

मंगलवार को अमरीकी सांसदों के सवालों के जवाब में पनेटा ने कहा कि अफ़गानिस्तान में इतनी प्रगति हो गई है कि ओबामा वहां फ़ौज में कटौती कर सकें.

कितनी कटौती

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Image caption कटौती पर पेट्रेयस (बाएं) और पनेटा दोनों के विचार एक जैसे हैं.

लेकिन साथ ही पनेटा ने ये भी कहा कि कटौती की संख्या और समयसीमा ज़मीनी स्थिति को देखते हुए ही तय की जानी चाहिए.

इसके ठीक पहले सेनेट आर्म्ड फ़ोर्सेस कमिटी के अध्यक्ष कार्ल लेविन ने कहा कि राष्ट्रपति ओबामा को कम से कम 15,000 सैनिकों को इस साल के आख़िर तक वापस बुला लेना चाहिए.

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि जनता चाहती है कि राष्ट्रपति जुलाई में अफ़गानिस्तान में तैनात फ़ौज की संख्या में ठोस कटौती का एलान करें. उन्होंने डेढ़ साल पहले ये वादा किया था और पिछले महीने भी उसे दोहराया था.”

लेविन ओबामा की डेमोक्रैट पार्टी के सदस्य हैं और उनके इस बयान को एक तरह की आतुरता के रूप में देखा जा रहा है कि अमरीका जल्द से जल्द अफ़गान युद्ध से हाथ खींचे.

ओबामा ने सोमवार को कहा था कि पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन की मौत ने अफ़गानिस्तान युद्ध के समीकरण को बदल कर रख दिया है और तालिबान की बढ़त पर अंकुश लगा है.

घरेलू राजनीति

उन्होंने कहा कि वो वहां तैनात फ़ौज में भारी कटौती नहीं करेंगे लेकिन साथ ही उन्होंने कहा, “बिन लादेन को मारकर, तालिबान के बढ़ते कदमों पर अंकुश लगा कर, हमने वो हासिल किया है जिसकी शुरूआत हमने 10 साल पहले की थी.”

अभी अमरीका के लगभग एक लाख सैनिक अफ़गानिस्तान में हैं.

अर्थव्यवस्था पर इस से बढ़ते दबाव और बिन लादेन की मौत के बाद आसार इस बात के नज़र आ रहे हैं कि ओबामा एक ठोस कटौती का एलान कर सकते हैं.

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Image caption ओबामा को घरेलू राजनीति और अफ़गानिस्तान की ज़मीनी स्थिति के बीच संतुलन बनाना होगा.

नए रक्षा मंत्री के रूप में लियोन पनेटा के लिए भी ये एक बड़ी चुनौती होगी.

अफ़गानिस्तान में अमरीकी सेना के प्रमुख जनरल डेविड पेट्रेयस कुछ ही दिनों में फ़ौज कटौती की रूपरेखा और विकल्प राष्ट्रपति को सौंपने वाले हैं.

पनेटा ने भी अभीतक उन्हीं के शब्दों को दोहराया है कि अफ़गानिस्तान में सफलता मिली है लेकिन ये “नाज़ुक है और पासा फिर से पलट सकता है.”

पनेटा ने अपने बयान में पाकिस्तान को भी चेतावनी जारी की है कि वो अपना वादा पूरा करे.

उन्होंने कहा है, “ये अहम है कि पाकिस्तान आतंकवाद विरोधी मामलों में पूरी तरह से सहयोग करे और अफ़गान तालिबान और अन्य चरमपंथियों को पनाह देना बंद करे.”

ज़ाहिर है फ़ौज में कटौती पर ओबामा और पनेटा किस तरह का फ़ैसला करते हैं इस पर पाकिस्तान और भारत समेत अन्य क्षेत्रीय देशों की भी पैनी नज़र होगी.

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