सालेह के ज़ख़्म बहुत गंभीर

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Image caption सालेह 1978 से यमन की सत्ता पर रहे हैं

अमरीकी अधिकारियों ने अमरीकी मीडिया को बताया है कि यमन के राष्ट्रपति पर पिछले सप्ताह जो रॉकेट हमला हुआ था उसमें अली अब्दुल्लाह सालेह कहीं ज़्यादा गंभीर रूप से घायल हुए हैं. पहले ख़बर ये आई थी कि उन्हें ज़्यादा चोट नहीं आई है.

अमरीकी अधिकारियों ने समाचार एजेंसी एपी को बताया है कि शुक्रवार को उस हमले में राष्ट्रपति सालेह का शरीर 40 प्रतिशत तक ज़ख़्मी हुआ है और उनके सिर से ख़ून बह रहा है.

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह राजधानी सना में हुए उस हमले के बाद सऊदी अरब चले गए थे जहाँ उनका इलाज चल रहा है.

अभी ये स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के घाव कितने गंभीर हैं मगर राष्ट्रपति के नज़दीकी सूत्रों ने शनिवार को बीबीसी को बताया था कि उनके चेहरे और सीने पर जलने के गंभीर घाव हैं. इसके अलावा उनके दिल में क़रीब तीन इंच का एक लोहे का टुकड़ा भी धंस गया है.

समाचार एजेंसी एपी ने ख़बर दी है कि सोमवार को सालेह के सीने में से लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े निकालने के लिए ऑपरेशन किया गया था और उनके चहरे पर भी गंभीर घावों का इलाज शुरू किया गया था.

69 वर्षीय सालेह को शुक्रवार के उस हमले के बाद सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है. उस हमले में सात लोग मारे गए थे और अनेक वरिष्ठ अधिकारी ज़ख़्मी भी हुए थे. अधिकारियों ने उस हमले को राष्ट्रपति की हत्या का प्रयास बताया है.

वैसे यमन के कार्यवाहक राष्ट्रपति अब्द रब्बू मंसूर हादी ने कहा है कि राष्ट्रपति सालेह कुछ ही दिनों में स्वदेश लौट आएंगे.

'ऑपरेशन'

अमरीकी प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा है कि वो सालेह के स्वास्थ्य के बारे में फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं करने वाले हैं.

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Image caption सालेह के देश छोड़ने पर लोगों ने खुशियां मनाईं.

अधिकारी ने कहा, “हम कोई डॉक्टर तो हैं नहीं. जैसा कि विदेश मंत्री हिलैरी क्लिंटन ने कल कहा था कि हम यहाँ सिर्फ़ यमन में शांति स्थापित कराने के लिए काम कर रहे हैं ताकि अहिंसक तरीक़े से सत्ता हस्तांतरण हो सके जो यमन के संविधान के भी अनुरूप हो.”

हिलैरी क्लिंटन ने सोमवार को यमन में तुरंत सत्ता हस्तांतरण का आहवान किया था.

हिलैरी क्लिंटन ने कहा था कि यमन को एक ऐसी प्रक्रिया की ज़रूरत है जिसके ज़रिए हर नागरिक ये जान सके कि उससे देश में आर्थिक और राजनीतिक सुधारों का रास्ता निकलेगा जिसकी माँग नागरिक कर रहे हैं.

अली अब्दुल्लाह सालेह 1978 से यमन के राष्ट्रपति रहे हैं और जब राजनीतिक सुधारों की माँग के साथ सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए थे तो उन्होंने सत्ता से हटने से इनकार कर दिया था.

प्रदर्शन शुरू होने के बाद देश में गृह युद्ध की स्थिति पैदा हो गई है जिसमें 350 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

सालेह हालाँकि बार बार कह चुके थे कि वो सत्ता हस्तांतरण के लिए तैयार हैं लेकिन खाड़ी सहयोग परिषद की प्रस्तावित शांति योजना के तहत वो सत्ता हस्तांतरण के लिए तैयार नहीं हुए.

राष्ट्रपति सालेह के गंभीर रूप से घायल होने की ये ख़बरें ऐसे समय आई हैं जब दक्षिणी शहर तायज़ और ज़िंजीबार में ताज़ा लड़ाई भड़क उठी है.

सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि ज़िंजीबार में कम से कम 30 लोग मारे गए हैं जिनमें से एक स्थानीय वरिष्ठ नेता को अल क़ायदा का नेता बताया गया है.

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