यमन में भारी लड़ाई, भारतीयों को सलाह

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Image caption राजधानी सना में क़बायली नेता सादिक़ अहमर के घर के पास उनका हथियारबंद समर्थक

दक्षिणी यमन के ज़िन्जीबार शहर में सरकारी सेना और हथियारबंद गुटों के बीच भारी लड़ाई हुई है.

यमनी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि सेना ने शहर पर नियंत्रण हासिल करने के क्रम में 30 हथियारबंद चरमपंथियों को मार डाला है जिनमें एक स्थानीय इस्लामी नेता शामिल है.

ये हिंसा यमन में राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के देश से बाहर चले जाने के कुछ दिनों बाद ही हुई है. राष्ट्रपति सालेह राष्ट्रपति आवास पर हुए हमले में घायल हो गए थे जिसके बाद उनको इलाज के लिए सउदी अरब ले जाया गया है.

यमनी अधिकारी इस हिंसा ले लिए अल-क़ायदा चरमपंथियों को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं.

मगर विरोधी गुटों का कहना है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए अल क़ायदा का नाम ले रही है ताकि राष्ट्रपति सालेह की सत्ता बनाए रखी जा सके.

सेना ने कहा है कि शहर को नियंत्रण में लेने के लिए तीन ब्रिगेडों को बुलाया गया है.

यमन के दूसरे बड़े शहर ताइज़ से भी हिंसा की ख़बरें आ रही हैं.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार शहर पर विद्रोहियों ने नियंत्रण कर लिया है.

यमन के कार्यवाहक राष्ट्रपति अबू रब्बू मंसूर हादी ने कहा है कि 69 वर्षीय सालेह कुछ ही दिनों में देश वापस लौटेंगे.

भारतीयों को सलाह

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने यमन में मौजूद भारतीयों के लिए एक बार फिर सलाह जारी करते हुए उन्हें यमन से बाहर निकल जाने की सलाह दी है.

मंत्रालय ने यमन से बाहर निकलने में सहायता के लिए फ़ोन नंबर और ई-मेल के माध्यम से हेल्पलाईन बनाए हैं और राजधानी सना में इसके लिए एक केंद्र भी बनाया गया है.

मगर विदेश मंत्रालय का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में दर्जन भर लोग भी मदद लेने के लिए नहीं पहुँचे हैं या यमन से बाहर निकले हैं.

मंत्रालय ने यमन में मौजूद भारतीयों को तत्काल सना में भारतीय मिशन से संपर्क करने की सलाह दी है.

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि भारतीयों को वहाँ से जो भी व्यावसायिक साधन उपलब्ध हैं उनका इस्तेमाल करते हुए भारत लौट जाना चाहिए.

मंत्रालय ने कहा है कि सरकार ने यमन में भारतीयों के संगठनों को भी इस स्थिति से अवगत करा दिया है.

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