'बाग़ी शहर' में सीरिया की कार्रवाई

टैंक
Image caption जिस्र अल-शुग़ूर शहर में टैंकों और सैनिकों की तैनाती की जा रही है

सीरिया में सरकारी टेलीविज़न चैनल का कहना है कि जिस्र अल-शुग़ूर शहर में सुरक्षा बहाल करने के लिए सेना ने अभियान शुरू कर दिया है.

सरकार के मुताबिक़ पश्चिमोत्तर शहर में इस हफ़्ते की शुरुआत में ही सैंकड़ो बंदूकधारियों और सैनिकों के बीच लड़ाई में 120 सैनिक मारे गए थे.

सरकारी टेलीविज़न ने ये भी घोषणा की कि जिस्र अल शुग़ूर के आस-पास के गांवों में भी सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया है ताकि बंदूकधारियों को पकड़ा जा सके.

इससे पहले इस शहर में रहने वाले लोगों ने बीबीसी को बताया कि सीरिया की सरकार उन्हें दंडित कर रही है. उनका कहना था कि मरीज़ों का सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं किया जा रहा है

गुरुवार से ही इस शहर में टैंकों और सैनिकों की तैनाती होने लगी. जिसके कारण कई लोग तुर्की भाग गए.

सरकार ये आरोप लगा रही है कि बंदूकधारियों के समूह ने सैनिकों को मारा है लेकिन ऐसी भी रिपोर्टे भी आ रही है कि वहां सुरक्षाबलों में ही बग़ावत हो गई थी.

सीरिया के सरकारी टेलीविज़न का कहना है कि इन बंदूकधारियों ने शहर पर कब्ज़ा कर लिया था और अपनी सुरक्षा की भी तैयारी कर ली थी.

मोर्चा

तुर्की सरकार का कहना है कि 2000 से ज़्यादा सीरियाई लोग सीमा पार कर देश में प्रवेश कर चुके है. मार्च महीने के मध्य में ही राष्ट्रपति बशर अल असद के ख़िलाफ़ वहां लोगों ने मोर्चा खोल दिया था.

सीरिया में विदेशी पत्रकारों को रिपोर्टिंग करने की अनुमति नहीं है, इसमें बीबीसी के पत्रकार भी शामिल है. ऐसे मे किसी भी रिपोर्ट की पुष्टि करने में ख़ासी दिक्कतें आ रही है.

बेरूत में मौ़जूद बीबीसी पत्रकार जिम म्यूर का कहना है कि जिस्र अल-शुग़ूर में जिस तरह से गतिविधियां हो रही है, वह राष्ट्रपति असद के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहे है.

सीरिया में जारी अशांति से सयुंक्त राष्ट्र परिषद में ही दरार पड़ गई है. फ़्रांस और ब्रिटेन ने ये प्रस्ताव दिया है, जिसमें सरकारी कार्रवाई की निंदा करने की बात कही गई है.

इस प्रस्ताव पर परिषद में शामिल अन्य देशों ब्राज़ील, चीन और रूस का कहना है कि इस तरह का प्रस्ताव कोई ठोस कार्रवाई का सुझाव नहीं देता और इससे स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है.

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