महिलाओं ने किया स्लटवॉक

इमेज कॉपीरइट Reuters

शनिवार को लंदन में सैकड़ों लोगों ने एक अनोखे मार्च में हिस्सा लिया- इसे ‘स्लटवाक’ या ‘वेश्याओं का मार्च’ नाम दिया गया है.

इस तरह के जुलूस का चलन इस साल कनाडा में शुरु हुआ था जब टोरंटो के एक पुलिस अधिकारी ने टिप्पणी कर दी थी कि अगर ‘महिलआएँ पीड़ित होने से बचना चाहती हैं तो उन्हें वेश्याओं के तरह कपड़े पहनने से बचना चाहिए.’

टिप्पणी के विरोध में कनाडा, अमरीका, यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में विरोध प्रदर्शन हुए हैं. इन प्रदर्शनों का मकसद इस हक़ की माँग करना है कि यौन प्रताड़ना के डर के बिना महिलाएँ अपने मन मुताबिक कपड़े पहन पाएँ.

लंदन का मार्च हाइड पार्क से शुरु हुआ जहाँ कार्निवल जैसा माहौल था. महिलाएँ रंग बिरंगी अलग-अलग तरह की पोशाक पहनकर आई थीं जिनमें से कुछ ‘बोल्ड’ पोशाक थीं. इस मार्च में पुरुष भी शामिल थे.

ट्रेफ़िक के शोर को चीरते ये लोग तरह-तरह के नारे लगा रहे थे जैसे- ‘बलात्कार करने वाले को दोष दो न कि पीड़ित को’, ‘ इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि मैने कैसे कपड़े पहने हैं’, ‘लोगों को ये सिखाओ की बलात्कार न करें न कि लोगों को ये सिखाओ कि कैसे आपका बलात्कार न हो’

'सारी ग़लती महिला की है'

इमेज कॉपीरइट AP

लंदन स्लटवॉक की आयोजक एसटासिया रिचर्डसन थीं जो केवल 17 साल की हैं. वे कहती हैं, “महिला चाहे अफ़ग़ानिस्तान की हो, अमरीका की या रूस की, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता...बहुत बार ऐसा होता है कि कुछ लोग ऐसा दर्शाना चाहते हैं कि सारी ग़लती महिला की ही है...कहेंगे शायद उसने ग़लत किस्म के कपड़े पहने हुए थे, उसने करारा जवाब नहीं दिया होगा, शायद उसने हिजाब नहीं पहना था. हम इसी मानसिकता को चुनौती देना चाहते हैं...ये विचार कि महिला चाहे किसी भी देश की हो, धर्म की हो उस पर हुए हमले के लिए वो ही ज़िम्मेदार है.”

वहीं 23 साल की सोफ़ी अपने अनुभव बाँटते हुए कहती हैं, “अगर आप किसी क्लब में जाते हैं तो अकसर ही ऐसा होता है कि लड़के आपके साथ ग़़लत व्यवहार करते हैं. ये लोग सोचते हैं कि ऐसा करना सही होगा क्योंकि लड़की ने शॉर्ट स्कर्ट पहनी हुई है.”

कई लोगों ने विरोध के इस तरीके और स्लट शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि इस तरह से एक गंभीर समस्या को एक छोटे मुद्दे तक सीमित किया जा रहा है.

लेकिन एसटासिया इस आलोचना से बेपरवाह हैं. वे कहती हैं, “मुझे पता है कि स्लट (वेश्या) शब्द के इस्तेमाल को लेकर समस्या है. लेकिन इसे स्लटवॉक कहने का एक कारण इस विचार को नकारना है कि किसी व्यक्ति को समाज के अन्य वर्गों के मुकाबले सुरक्षा की कम ज़रूरत है.”

टोरंटो के एक पुलिसकर्मी की एक टिप्पणी ने दुनिया भर में विरोध के एक अलग तरह के चलन को जन्म दे दिया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सारी महिला संगठन भले ही इस तरीके से सहमत न हों पर इतना ज़रूर हुआ है कि दुनिया भर में इस मुद्दे पर चर्चा और बहस ज़रूर हो रही है.

संबंधित समाचार