हज़ारों सीरियाई लोग तुर्की भागे

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Image caption सीरिया-तुर्की सीमा पर तुर्की के भीतर जाने की कोशिश कर रहे सीरियाई शरणार्थी

तुर्की के अधिकारियों का कहना है कि पड़ोसी देश सीरिया में हिंसा से बचने के लिए चार हज़ार से अधिक सीरियाई लोग सीमा पार कर तुर्की चले आए हैं.

अधिकांश लोग उत्तरी सीरिया के शहर जिसर अल शूगूर से भाग रहे हैं जहाँ सीरियाई सेना कार्रवाई कर रही है.

सरकार विरोधी आंदोलन के बीच इस शहर में सोमवार को हिंसा में 120 सुरक्षाकर्मियों को मार डाला गया था.

सीरियाई सेना का कहना है कि शहर में स्थिति नियंत्रित करने के लिए सेना को वहाँ भेजा गया है.

इस बीच सीरिया में अन्य जगहों पर संघर्ष हो रहें हैं और कम-से-कम 32 लोग मारे गए हैं.

सीरिया में मार्च में शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के लिए पिछले कुछ हफ़्तों से जारी कार्रवाई के कारण सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं.

शरणार्थी

तुर्क अधिकारियों ने सीरिया से आए शरणार्थियों की संख्या 4300 बताई है.

मगर समझा जाता है कि ये संख्या और अधिक हो सकती है क्योंकि बहुत सारे लोग तुर्की सैनिकों की निगाहों में आए बिना तुर्की में दाख़िल हो गए हैं.

तुर्की के प्रधानमंत्री रज़्ज़प तायिप अर्दोगान ने कहा है कि सीरियाई शरणार्थियों का स्वागत किया जाना चाहिए.

सीमा पर रहनेवाले बहुतेरे तुर्कीवासियों ने भी कहा है कि संकट की घड़ी में सीरियाई लोगों की मदद करनी चाहिए.

मगर कई लोगों में इस बात को लेकर भी चिंता है कि यदि ये स्थिति बहुत लंबे समय तक बनी रही तो उसके परिणाम क्या होंगे.

कार्रवाई

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Image caption उत्तरी सीरिया के जिशर अल शूगूर शहर की ओर बढ़ते सीरियाई सैनिक

सीरिया के सरकारी टीवी चैनल और वहाँ मौजूद कार्यकर्ताओं ने कहा है कि सीरियाई सेना और टैंक जिसर अल शूगूर के पास पहुँच चुके हैं.

सीरियाई टीवी पर कहा जा रहा है कि हथियारबंद गुटों की दो नेतृत्व टुकड़ियों को पकड़ लिया गया है और कई बंदूकधारियों को मारा या घायल किया गया है.

ये स्पष्ट नहीं है कि इस कार्रवाई का कितना विरोध हो रहा है क्योंकि बहुत सारे लोग पहले ही ख़तरे को भांपकर इलाक़े से निकल चुके हैं.

इस बीच लगातार ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि सोमवार को शहर में लगभग सवा सौ सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की घटना के पीछे एक कारण सेना के भीतर ही विद्रोह हो सकता है. हालाँकि इन ख़बरों की पुष्टि नहीं हो पाई है.

कुछ ऐसी ही ख़बरें एक और शहर मारत अल नूमान से भी मिल रही हैं कि वहाँ शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद सरकारी भवनों और पुलिस मुख्यालयों को निशाना बनाया गया और दोनों तरफ़ से लोग मारे गए.

सीरियाई कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि आनेवाले समय में विद्रोह खिंचने और दबाव बढ़ने के बाद सेना के भीतर और अधिक दरारें दिखाई दे सकती हैं.

सीरियाई सेना की कमान वैसे तो राष्ट्रपति असद और उनके अल्पसंख्यक अलावी समुदाय के हाथ में है, मगर सैनिक अधिकतर सुन्नी समुदाय के हैं और विरोधियों में भी अधिकतर सुन्नी ही हैं.

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