तुर्की: सत्ताधारी पार्टी ने चुनाव जीता

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तुर्की में हुए चुनाव में प्रधानमंत्री रजब तैय्यब अरदोगान की जस्टिस एंड डिवेलपमेंट पार्टी (एकेपी) तीसरी बार सत्ता में आ गई है.

अपने विजय संदेश में उन्होंने कहा कि वे अपने विरोधियों के साथ मिलकर संविधान पर काम करेंगे. अपने समर्थकों को संबोधन में रजब तैय्यब अरदोगान ने कहा कि वे सर्वसम्मति चाहते हैं जिसमें सबको लगे कि उनकी बात सुनी गई है.

तकरीबन सभी नतीजे आ चुके हैं. रविवार को हुए चुनाव में उनकी पार्टी ने करीब 50 फ़ीसदी सीटें जीती हैं. इसका मतलब पार्टी संसद में बहुमत मिल गया है. लेकिन दो तिहाई बहुमत से वो चूक गई.

धर्मनिर्पेक्ष रिपब्लिनक पीपल्स पार्टी को अब तक 26 फ़ीसदी वोट मिले हैं जबकि नेशनलिस्ट मूवमेंट पार्टी को 13 फ़ीसदी.

विपक्ष का वोट शेयर बढ़ा

अब जबकि नेशनलिस्ट मूवमेंट पार्टी को 13 फ़ीसदी वोट मिल चुके हैं तो इसका मतलब है कि एकेपी को दो तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया है और वो बिना जनमतसंग्रह करवाए संविधान में संशोधन नहीं कर पाएगी.

अगर देश के संविधान में संशोधन करना है तो दो तिहाई बहुमत चाहिए. आठ साल तक सत्ता में रहने के बाद एकेपी को उम्मीद थी कि वो दो तिहाई बहुमत हासिल कर लेगी जिससे वो संविधान में संशोधन कर सके. वो किसी भी संशोधन के प्रस्ताव को लोगों के सामने भी तब तक पेश नहीं कर सकती जब तक विपक्ष से बात न कर ले.

इस्लामिक आधार वाली एकेपी के पिछले दो कार्यकाल के दौरान तुर्की में आर्थिक विकास हुआ है और उसने अधिक निश्चयात्मक विदेश नीति अपनाई है. यही नहीं बेरोज़गारी भी घटी है. पिछले साल मार्च के महीने में बेरोज़गारी 14.4 प्रतिशत थी जो इस मार्च में घटकर 11.5 प्रतिशत रह गई.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि प्रधानमंत्री की जीत का मतलब है कि तुर्की के संस्थापक अतातुर्क के बाद वे देश के सबसे शक्तिशाली नेता बन गए हैं.

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