ग़ज़ा की आर्थिक स्थिति बदतर

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संयुक्त राष्ट्र ने ग़ज़ा की आर्थिक स्थिति पर एक निराशाजनक रिपोर्ट जारी की है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस फ़लस्तीनी क्षेत्र में बेरोज़गारी 45 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जो दुनिया के उच्चतम स्तर में से एक है.

ये रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब ग़ज़ा की आर्थिक नाकेबंदी के पाँच साल पूरे हुए हैं. आर्थिक नाकेबंदी इसराइल ने की है.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने ग़ज़ा की आर्थिक स्थिति का निराशाजनक चेहरा पेश किया है. रिपोर्ट में ये कहा गया है कि यहाँ के क़रीब-क़रीब दो लोगों में से एक व्यक्ति बिना नौकरी के है.

गिरावट

यही नहीं पिछले पाँच वर्षों के दौरान मज़दूरी में एक तिहाई से ज़्यादा की गिरावट आई है. हमास के सत्ता में आने के बाद वर्ष 2007 में इसराइल ने ग़ज़ा की आर्थिक नाकेबंदी और कड़ी कर दी थी.

हालाँकि संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि हमास के अधीन चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र ऐसे कुछ सेक्टर हैं, जहाँ आर्थिक प्रगति हुई है और सरकार ने हज़ारों लोगों को नौकरी दी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्यात पर लगी पाबंदी के कारण निजी क्षेत्र काफ़ी प्रभावित हुआ है. पिछले साल इसराइल ने पाबंदी में थोड़ी ढील देते हुए कुछ सामग्रियों के आयात की अनुमति दी थी.

लेकिन इसराइली सरकार के एक प्रवक्ता का कहना है कि आर्थिक नाकेबंदी जारी है क्योंकि ये क्षेत्र का शासन अब भी 'आतंकवादी गुट' के हाथ में है.

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