इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्नों को पलटें तो 14 जून को अमरीका की कॉन्टिनेन्टल कांग्रेस ने एक बैठक के दौरान में अपना पहला झंडा चुना. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मन सेना आज ही के दिन फ्रांस में घुसी थी.

1777: अमरीका ने झंडा अपनाया

Image caption 14 जून का दिन अब अमरीका में हर साल झंडा दिवस के तौर पर मनाया जाता है.

अमरीकी क्रांति के दौरान ब्रिटेन के वो उपनिवेश जो बाद में संयुक्त राज्य अमरीका कहलाए, वर्ष 1774 में एकजुट हुए जिससे कॉन्टिनेन्टल कांग्रेस का गठन हुआ.

कांग्रेस ने 14 जून 1777 को फिलेडेल्फिया में एक बैठक कर नए देश के झंडे का स्वरूप तय किया.

जो प्रस्ताव पारित किया गया उसके मुताबिक झंडे में 13 लाल और सफेद पट्टियाँ होनी थी. साथ ही संयुक्त राज्य के प्रतीक के तौर पर नीली सतह पर 13 सफे़द तारों का चित्रण तय किया गया था.

प्रस्ताव में कहा गया कि ये तारे एक नए नक्षत्र का आगाज़ करेंगे.

लेकिन इसके बाद झंडे में लकीरों और तारों की संख्या में कई बार तबदीली की गई.

वर्ष 1818 में अमरीका की कांग्रेस ने एक प्रस्ताव पारित कर ये तय कर दिया कि पट्टियों की संख्या में कोई इज़ाफ़ा नहीं होगा, यानि वो हमेशा 13 की 13 ही रहेंगी लेकिन जब कभी भी कोई नया राज्य अमरीका में जुड़ेगा तो झंडे में एक नया तारा जोड़ दिया जाएगा.

माना जाता है कि झंडा दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1885 में हुई. उस साल फ्रेडोनिया के एक स्कूल के अध्यापक ने पहली बार 14 जून को स्कूली बच्चों के साथ अमरीका के झंडे की वर्षगांठ मनाई थी.

1940: जर्मन सेना फ्रांस में घुसी

Image caption जर्मन सेनाओं ने पेरिस में विजय रैलियां निकालीं.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरन 14 जून 1940 को जर्मन सेना फ्रांस की राजधानी पेरिस में दाखिल हुई थी.

फ्रांस के सैन्य गवर्नर ने कुछ दिन पहले ही पेरिस से फ्रांसिसी सैन्य बलों को हटने के आदेश दे दिए थे ताकि जर्मन सेना के आने पर शहर में कोई ख़ून खराबा ना हो.

हिटलर के नेतृत्व में जर्मन सेना ने पश्चिमी यूरोप पर 10 मई से हवाई हमले शुरु कर दिए थे. और चार जून तक जर्मनी सहयोगी देशों की सेनाओं को पछाड़ कर उत्तरी फ्रांस में दाखिल हो गई थी.

फिर जर्मन सेनाओं ने डंकर्क की बंदरगाह पर कब्ज़ा कर लिया था और पेरिस की ओर बढ़ने लगी थीं.

जर्मन सेनाएं शहर के उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिम की सीमाओं से पेरिस में दाखिल हुईं थीं.

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