इटली: परमाणु ऊर्जा संयंत्रो को जनता की मनाही

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इटली में मतदाताओं ने परमाणु संयंत्रों को फिर से शुरू किए जाने और सरकार की कुछ दूसरी अहम नीतियों को एक जनमतसंग्रह में ख़ारिज कर दिया है.

मत देनेवाले 95 फ़ीसद वोटरों ने ऊर्जा पैदा करने के लिए परमाणु संयंत्रों को फिर से शुरू किए जाने का विरोध किया है.

इटली ने रूस में हुए चेरनोबिल परमाणु हादसे के बाद परमाणु संयंत्रो को बंद कर दिया था. पच्चीस साल बाद हुकुमत इन्हें अब फिर से शुरू करना चाहती है.

मतदाताओं ने पानी की सप्लाई के निजीकरण की हुकुमत की पालिसी पर भी मुहर लगाने से इंकार कर दिया.

जनमतसंग्रह में एक मुद्दा मंत्रियों के ख़िलाफ़ अदालती कारवाई से संबंधित था जिसपर भी मतदाताओं ने ना कहा.

प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी पर ख़ुद चार आपराधिक मुक़दमे चल रहे हैं जिसमें यौन संबंध के लिए एक कम उम्र की महिला को पैसे देने का आरोप शामिल है.

उन्होंने इन आरोपों से इंकार किया है.

सरकार की नाकामी

सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने कहा कि इटली के लोगों ने अपना मत 'साफ़' कर दिया है और संसद को इसी 'अनुसार' काम करना चाहिए.

उन्होंने कहा, "इन सभी मामलों पर इटली की जनता की राय साफ़ है."

लेकिन विरोधी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता प्याल्यूजी बेर्सानी ने कहा है कि ये एक बहुत "अहम दिन" है जब मतदाताओं ने फिर से बता दिया है कि बर्लिसकोनी सरकार का कामकाज कितना ख़राब रहा है.

दो दिनों में हुए इस जनमतसंग्रह में 57 प्रतिशत लोगों ने हिस्सा लिया था.

यह तादाद पहले हुए जनमतसंग्रों के मुक़ाबले बहुत ज़्यादा थी. लोगों को घरों से बाहर लाने में वामपंथी दलों ने काफ़ी अहम भूमिका निभाई.

'इटली की ज़मीन पर नहीं'

मंगलवार सुबह आए नतीजों में 10 में से नौ लोगों ने साफ़ कर दिया है कि वो इटली की सरज़मीन पर कोई परमाणु संयंत्र नहीं चाहते हैं.

रोम में मौजूद बीबीसी संवाददाता डंकन केनेडी ने कहा है कि जापान मे हाल में आए भूकंप और सुनामी के दौरान हुए फुकुशिमा परमाणु संयंत्र दुर्घटना ने मतदाताओं का मन बनाने में बहुत अहम भूमिका निभाई है.

जापान की दुर्घटना के बाद जर्मनी ने भी परमाणु ऊर्जा संयंत्रो को छोड़ने का फ़ैसला किया है.

परमाणु संयंत्रो का विरोध करनेवाले गुटों ने कहा कि और देशों को सामने आकर इस अभियान में शामिल होना चाहिए.

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