कौन हैं अल ज़वाहिरी?

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पेशे से आँखों के डॉक्टर, मिस्र के “इस्लामिक जिहाद” नाम के चरमपंथी संगठन के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अयमन अल ज़वाहिरी को अल क़ायदा में ओसामा बिन लादेन का दाहिना हाथ कहा जाता रहा है.

कुछ विशेषज्ञों का मानना हैं कि 11 सितम्बर 2001 को न्यूयार्क में हुए हमलों के पीछे अल ज़वाहिरी का ही दिमाग काम कर रहा था.

अमरीका ने वर्ष 2001 में जिन 22 सर्वाधिक वांछित चरमपंथियों की सूची जारी की थी उनमें ओसामा बिन लादेन के बाद ज़वाहिरी दूसरे नंबर पर थे.

अमरीका की संघीय जाँच संस्था एफबीआई की वेबसाइट पर सर्वाधिक वांछित चरमपंथियों में अल ज़वाहिरी को अमरीकियों का हत्यारा और अमरीकियों की हत्या करने की साजिश रचने वाला बताया गया है.

एफबीआई ने उनके बारे में सूचना देने वाले को 25 मिलियन डॉलर का इनाम देने की घोषणा कर रखी है.

भूमिगत

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Image caption 8 जून 2011 को जारी किए गए इस सेटेलाइट चित्र में अल ज़वाहिरी,ओसामा बिन लादेन के रास्ते पर चलने को कह रहे है.

बताया जाता है कि ज़वाहिरी को आख़िरी बार अक्तूबर 2001 में अफ़ग़ानिस्तान के ख़ोस्त शहर में देखा गया था. अफ़ग़ानिस्तान से तालिबान की सत्ता ख़त्म होने के बाद से वे भूमिगत हो गए.

कई बार ये भी कहा गया कि वे या तो उत्तरी अफ़्रीका या मध्य पूर्व में कहीं भाग गए मगर अमरीकी अधिकारी यही कहते रहे कि अल ज़वाहिरी और ओसामा बिन लादेन के साथ अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के सीमावर्ती दुर्गम पहाड़ी इलाक़े में कहीं छिपे हैं.

हाल के वर्षों में अल ज़वाहिरी अल क़ायदा के सबसे मुखर प्रवक्ता के रूप में उभर कर सामने आए. 2007 में अल क़ायदा की ओर से जारी किये गए सोलह वीडियो और ऑडियो टेप में वो ही थे.

चरमपंथ की दुनिया में अल ज़वाहिरी के बढ़ते कद के चलते 13 जनवरी 2006 में अमरीका ने उन्हे मारने के मकसद से पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर मिसाइल हमला किया. इस हमले में अल क़ायदा के चार सदस्य मारे गए, लेकिन ज़वाहिरी बच गए.

दो हफ्ते बाद अल ज़वाहिरी एक वीडियो टेप में नज़र आए जिसमें उन्होनें अमरीका के तत्कालीन राष्ठ्रपति जार्ज बुश को धमकी देते हुए कहा कि दुनिया की सारी ताकतें मिलकर भी उनकी मौत को एक सेकेंड भी पीछे नहीं सरका सकतीं.

जुलाई 2007 में अल ज़वाहिरी एक बार फिर वीडियो टेप में दिखाई दिए. आधे घंटे के इस वीडियो में उन्होनें दुनिया के सारे मुसलमानों को अल क़ायदा के विश्वव्यापी जिहाद में शामिल होने को कहा.

दिसम्बर 2007 में जारी वीडियो में अल ज़वाहिरी ने अपने साक्षात्कार के लिए लोगों को आमंत्रित किया और इच्छुक संगठनों, व्यक्तियों और पत्रकारों से अपने सवाल भेजने को कहा.

पढ़े लिखे परिवार के सदस्य

ज़वाहिरी का जन्म 1951 में मिस्र के एक ऐसे मध्यवर्गीय परिवार मे हुआ जिसमें कई लोग डॉक्टर और दूसरे क्षेत्रों के विद्वान थे.

ज़वाहिरी के दादा रबी अल ज़वाहिरी अरब जगत में इस्लामिक अध्ययन केंद्र, काहिरा के अल अज़हर विश्वविद्यालय के प्रमुख इमाम थे.

अयमन अल ज़वाहिरी पहली बार 15 साल की उम्र में गिरफ़्तार हुए. उन्हें अरब जगत के सबसे पुराने कट्टरपंथी संगठन, मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ जुड़ने के कारण पकड़ा गया था.

वर्ष 1974 में काहिरा के मेडिकल कॉलेज से उन्होंने स्नातक की उपाधि और चार साल बाद यहीं से सर्जरी में मास्टर्स की डिग्री भी हासिल की.

उनके पिता इसी कॉलेज में फार्माकोलॉजी के प्रोफ़ेसर थे जिनकी 1995 में मृत्यु हो गई.

राजनीति

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Image caption मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति अनवर सादात की इस्लामिक जिहाद संगठन ने हत्या कर दी थी

वर्ष 1981 में काहिरा में एक परेड के दौरान राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या के मामले में कुछ अन्य कट्टरपंथी इस्लामी चरमपंथियों के साथ-साथ डॉक्टर ज़वाहिरी पर भी मुक़दमा चलाया गया था.

उन्हें हथियार रखने का दोषी पाया गया और उन्हें तीन साल की सज़ा हुई.

यहाँ से वे पाकिस्तान के शहर पेशावर और फिर अफ़ग़ानिस्तान के लिए निकल पड़े जहाँ उन्होंने इस्लामी जिहाद की शुरूआत की.

वे 1970 और 1980 के दशक में सोवियत क़ब्ज़े के वक़्त अफ़ग़ानिस्तान में ही थे.

1999 में मिस्र की एक अदालत ने उनकी अनुपस्थिति में ही उन्हें मौत की सज़ा सुनाई.

कहा जाता है कि चरमपंथियों का साथ देने के आरोप में उन्हें रूस में भी छह महीने हिरासत में रखा गया.

अमरीका पर हमले

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Image caption ओसामा के मारे जाने के बाद से ही अल ज़वाहिरी को प्रमुख बनाए जाने की चर्चा चल रही थी

समझा जाता है कि अल ज़वाहिरी ने 1990 की दशक के शुरू में डेनमार्क और स्विट्ज़रलैंड में समय बिताया जहाँ वे नक़ली पासपोर्ट पर गए.

एक वीडियो कैसेट में वे लादेन के साथ बैठे दिखते हैं जिसमें वे अमरीका को चेतावनी देते हैं.

ज़वाहरी ये चेतावनी मिस्र के निवासी शेख उमर अब्दुल रहमान को छोड़ने के लिए देते हैं जिन्हें 1993 के विश्व व्यापार केंद्र बमकांड के सिलसिले में पकड़ लिया गया था.

1998 में फिर उनका नाम लादेन के उन पाँच सहयोगियों के रूप में सामने आया जिन्होंने अमरीकी नागरिकों की हत्या के लिए 'फ़तवा' जारी किया था

उनका नाम उन कुछ ऐसे लोगों में लिया जाता है जिनकी सैटेलाइट फ़ोन पर हुई बातचीत से पता चला कि 1998 में कुछ अमरीकी दूतावासों पर हमले के पीछे ओसामा बिन लादेन का हाथ था.

एक और दो मई की दरम्यानी रात को अमरीकी सेना ने कार्रवाई करके पाकिस्तान के ऐबटाबाद में अल क़ायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार दिया था.

इसके बाद अब अल ज़वाहिरी को अल क़ायदा का अगला प्रमुख चुना गया है.

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