जेल में कट रही ज़िंदगी को उम्मीद

डॉक्टर ख़लील चिश्ती

डॉक्टर चिश्ती दिल के मरीज़ हैं, उनका कूल्हा टूटा हुआ है और उन्हें लकवा मार गया है.

हत्या के एक मामले में एक भारतीय जेल में बंद 80 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक डॉक्टर ख़लील चिश्ती के बेटी शोआ जावेद ने कहा है कि भारतीय न्यायाधीश जस्टिस काटजू की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इसी विषय पर लिखी चिठ्ठी के बाद उनकी उम्मीद बढ़ गई है कि वो जल्द ही अपने पिता को देख पाएंगी.

डॉक्टर चिश्ती दिल के मरीज़ हैं, उनका कूल्हा टूटा हुआ है और वो लकवे से भी पीड़ित हैं.

डॉक्टर चिश्ती पर 18 साल मुक़दमा मुक़दमा चला और बाद में उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा हो गई. वो अभी जेल में बंद हैं.

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र लिखकर डॉक्टर चिश्ती को रिहा करने की अपील की है.

‘उम्मीद कायम’

ये पत्र उनकी ओर से एक बड़ा संकेत है, खासकर ऐसे वक्त जब हमारे न्यायालय ने इस मामले में दखल देने से मना कर दिया. बहुत बड़ी बात है कि एक भारतीय न्यायाधीश हमारे पिता के लिए अपील कर रहे हैं. मुझे उम्मीद है इसका भारत में अच्छा असर पड़ेगा

शोआ जावेद, डॉ चिश्ती की बेटी

कराची से रह रहीं शोआ जावेद ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा, "ये पत्र उनकी ओर से एक बड़ा संकेत है, खासकर ऐसे वक्त जब हमारे न्यायालय ने इस मामले में दखल देने से मना कर दिया. बहुत बड़ी बात है कि एक भारतीय न्यायाधीश हमारे पिता के लिए अपील कर रहे हैं. मुझे उम्मीद है इसका भारत में अच्छा असर पड़ेगा."

दरअसल, शोआ ने पाकिस्तानी उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कि जिस तरह पाकिस्तान में लंबे समय तक हिरासत में रहे गोपाल दास के मामले में भारतीय उच्चतम न्यायालय ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति से अपील की थी, उसी तरह पाकिस्तानी उच्चतम न्यायालय भी भारतीय राष्ट्रपति से अपील करे कि डॉक्टर चिश्ती को रिहा कर दिया जाए.

पाकिस्तानी उच्चतम न्यायालय ने ये याचिका ये कहते हुए ख़ारिज कर दी थी कि ऐसा करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है.

क़रीब 27 साल पाकिस्तानी जेल में बंद रहे भारतीय नागरिक गोपाल दास हाल ही में भारत वापस आए हैं.

उधर जस्टिस काटजू ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा है, "डॉक्टर चिश्ती बूढ़े और कमज़ोर हैं, और अजमेर जेल में हैं. मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि पाकिस्तानी नागरिक डॉक्टर खलील चिश्ती को मानवीय आधार संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत रिहा कर दिया जाए."

एक भारतीय न्यायाधीश का देश के प्रधानमंत्री को इस तरह का पत्र लिखना सामान्य घटना नहीं है.

मामला

डॉक्टर चिश्ती वर्ष 1992 में अपनी माँ से मिलने अजमेर आए थे, लेकिन उसी दौरान उनके परिवार और कुछ लोगों के बीच हुई हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई. इस घटना में डॉक्टर चिश्ती का भी नाम आया और अपराध का ये मुकदमा 18 साल खिंचा.

डॉक्टर चिश्ती बूढ़े और कमज़ोर हैं, और अजमेर जेल में हैं. मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि पाकिस्तानी नागरिक डॉक्टर खलील चिश्ती को मानवीय आधार संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत रिहा कर दिया जाए

जस्टिस काटजू के पत्र का हिस्सा

डॉक्टर चिश्ती को ज़मानत तो मिली लेकिन उन्हें अजमेर से बाहर जाने की इजाज़त नहीं थी.

उन्हें दूसरे और कानूनों का भी पालन करना था. वर्ष 2010 में केस पर फ़ैसला हुआ और उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा दी गई.

डॉक्टर चिश्ती की अपील राजस्थान उच्च न्यायालय में लंबित है, लेकिन उनकी ज़मानत रद्द कर दी गई है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखी अपने पत्र में जस्टिस काटजू ने कहा है कि अगर डॉक्टर चिश्ती की मौत जेल में हो जाती है तो ये देश के लिए ये शर्म की बात होगी.

जस्टिस काटजू ने कहा, "मैं इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा हूँ क्योंकि केस न्यायालय में है. लेकिन अदालती कार्रवाईयों के अलावा राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास माफ़ी देने के भी अधिकार हैं."

माफ़ी की अपील

उनकी ज़िंदगी के साल-दो साल ही रह गए हैं और वो उम्मीद कर रहे हैं कि उनके बड़े भाई ज़िंदगी के बाक़ी के दिन कराची में अपने घर में गुज़ार पाएंगे

भाई की अपील

फ़िल्मकार महेश भट्ट और कई दूसरे लोगों ने राष्ट्रपति और राजस्थान के राज्यपाल से अपील की है कि डॉक्टर चिश्ती को संविधान के अनच्छेद 72 के अंतर्गत माफ़ी दे दी जाए.

अजमेर में रह रहे डॉक्टर चिश्ती के भाई जमील चिश्ती ने सरकार से अपील की है, "उनकी ज़िंदगी के साल-दो साल ही रह गए हैं और वो उम्मीद कर रहे हैं कि उनके बड़े भाई ज़िंदगी के बाक़ी के दिन कराची में अपने घर में गुज़ार पाएंगे."

जस्टिट काटजू ने कहा कि वो भी इस अपील के साथ हैं ताकि डॉक्टर चिश्ती अपने बचे हुए आखिरी दिन अपने घर कराची में गुज़ार सकें.

जस्टिस काटजू ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि वर्ष 1961 के उच्चतम न्यायालय ने मशहूर केस 'नानावटी बनाम स्टेट ऑफ़ बांबे' में एक फ़ैसले के मुताबिक़ अगर कोई केस अदालत में लंबित है, तब भी व्यक्ति को माफ़ी दी जा सकती है.

डॉक्टर चिश्ती की पाँच बेटियाँ हैं और एक बेटा है. उन्होंने एडिनबरा विश्वविद्यालय से माईक्रोबायलोजी में पीएचडी की थी. इसके अलावा उन्होंने कराची, जेद्दाह और नाईजीरिया मे छात्रों को पढ़ाया भी है.

शोआ बताती हैं कि उनके पिता की पैदाइश अजमेर की है जहाँ उन्होंने नौंवी कक्षा तक पढ़ाई भी की.

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