फ़ुकुशिमा में फिर काम रुका

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Image caption रेडियोधर्मी पानी को परमाणु संयत्र से निकालकर ख़ास किस्म के बक्सों में रखने की योजना है

जापान में दुर्घटनाग्रस्त फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र में रेडियोधर्मिता अत्यधिक बढ़ जाने की वजह से दूषित पानी को निकालने का काम रोक दिया गया है.

इस संयंत्र में इस समय करीब 110 ,000 टन पानी जमा है.

गत 11 मार्च को आई सुनामी के बाद तेज़ी से गर्म हो रहे परमाणु रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए ये पानी परमाणु उर्जा संयंत्रों में डाला गया था.

इस पानी की मात्रा का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इतने पानी से ओलंपिक साइज़ के 40 स्वीमिंग पूल भरे जा सकते हैं.

इस प्रदूषित पानी के समुद्र में रिसाव का ख़तरा खड़ा हो गया है.

यूक्रेन के 1986 के चेर्नोबिल हादसे के बाद से ये दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा परमाणु हादसा है.

जापान में मार्च में आई सुनामी की वजह से अब तक 15 हज़ार 280 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है और क़रीब आठ हज़ार 500 लोगों का अब तक कोई पता नहीं है.

अज्ञात कारण

फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र के चालक कंपनी टोक्यो इलेक्ट्रिक पॉवर कंपनी (टेप्को) के एक प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी के इंजीनियर तेज़ी से बढ़ रही रेडियोधर्मिता के कारण को पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

टोक्यो में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि रेडियोधर्मी पानी का निकास फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में पैदा हुई समस्या के निदान की दिशा में बहुत बड़ा कदम है.

जापान में बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और इस बात का ख़तरा बढ़ रहा है कि बारिश के पानी के कारण परमाणु संयंत्र के भीतर जमा प्रदूषित पानी बह कर समुद्र में न जा मिले.

टेप्को का कहना है कि ये सभी दुर्घटनाग्रस्त संयंत्र जनवरी 2012 से सुरक्षित रूप से बंद कर दिए जाएंगे.

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