भारत का सैन्य प्रतिनिधिमंडल चीन में

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करीब एक साल के अरसे के बाद भारत का कोई सैन्य प्रतिनिधिमंडल रविवार से चीन में हैं. दोनों देशों के बीच एक वर्ष के बाद इस तरह का सैन्य आदान-प्रदान कार्यक्रम फिर से शुरु हुआ है. हालांकि विशेषज्ञ इस दौरे से कोई ख़ास उम्मीद नहीं कर रहे.

पिछले साल ऐसी ख़बरें आई थीं कि चीन ने भारत के नॉर्दन आर्मी कमांड के तत्कालीन प्रमुख को उपयुक्त वीज़ा नहीं दिया था, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर का इलाक़ा आता है.

इसके बाद से भारत-चीन के बीच सैन्य अधिकारियों के दौरे स्थगित कर दिए गए थे. सैन्य अधिकारी का चीन दौरा रद्द होने से कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया था.

उस समय अख़बारों में ख़बर छपी थी कि ‘कश्मीर में तैनात एक जनरल को चीन ने वीज़ा देने से इनकार कर दिया है और लेफ़्टिनेंट जनरल बीएस जयसवाल को वीज़ा देने से इनकार किए जाने के बाद नाराज़ भारतीय अधिकारियों ने भी दो चीनी सैन्य अधिकारियों को भारत आने देने की अनुमति देने से इनकार कर दिया.’

रिश्तों में तनाव

अब बताया जा रहा है कि भारत से आठ सदस्यों का दल चीन के छह दिन के दौरे पर है.

पिछले साल को छोड़ दें तो दोनों देशों के बीच पिछले कुछ बरसों से सैन्य आदान-प्रदान का कार्यक्रम चल रहा है जिसके तहत दोनों देशों के सैन्य अधिकारी एक दूसरे के देश में जाकर कुछ अध्ययन या प्रशिक्षण आदि ले सकते हैं.

सीमा विवाद, अरुणाचल प्रदेश और कश्मरी के एक हिस्से को लेकर भारत और चीन में लंबे समय से मतभेद रहे हैं. दोनों देश एक युद्ध भी लड़ चुके हैं. इसके अलावा तिब्बत के मुद्दे को लेकर भी तनाव रहा है.

चीन हमेशा से पाकिस्तान के करीब रहा है और चीन-पाकिस्तान की ये दोस्ती भी भारत के लिए असहजता का कारण रही है.