अमरीका ने तालिबान के साथ बातचीत की पुष्टि की

अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने पहली बार इस बात की पुष्टि की है कि अमरीका और कुछ अन्य देश अफ़गानिस्तान में तालिबान के साथ बातचीत कर रहे हैं.

रक्षा मंत्री गेट्स ने रविवार को एक टेलीविज़न इंटरव्यू में कहा है कि ये “आरंभिक बातचीत” अमरीकी विदेश विभाग कर रहा है.

शनिवार को अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा था कि अमरीका ने तालिबान के साथ शांतिवार्ता शुरू कर दी है और ये पहली बार है जब अमरीका ने इसे स्वीकार किया है.

कुछ ही दिनों में अपना छोड़ रहे रॉबर्ट गेट्स ने कहा कि ये बातचीत “संपर्क” बढ़ाने के लिए है और किसी भी तरह की ठोस प्रगति होने में महीनों लग सकते हैं.

गेट्स ने कहा, “ज़्यादातर युद्ध राजनीतिक हल के ज़रिए ही ख़त्म होते हैं.”

अमरीका इस जुलाई से अफ़गानिस्तान से अपनी फ़ौज हटाने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है.

तालिबान अल क़ायदा से अलग है: संयुक्त राष्ट्र

कौन है तालिबान?

अफ़गानिस्तान में इस समय 97,000 अमरीकी सैनिक तैनात हैं.

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Image caption रक्षा मंत्री गेट्स का कहना है कि बातचीत को किसी ठोस दिशा में जाने में महीनों लगेंगे.

अमरीका की मंशा 2014 तक पूरी सुरक्षा व्यवस्था को स्थानीय अफ़गान सुरक्षा बलों के हाथों में सौंप देने की है.

वक्त लगेगा

सीएनएन टीवी चैनल से बात करते हुए गेट्स ने कहा, “मेरी अपनी समझ है कि सही मायने में समझौते की बातचीत इस जाड़े से पहले किसी ठोस दिशा में नहीं बढ़ पाएगी.”

गेट्स जून के अंत में रक्षा मंत्री पद छोड़ रहे हैं और उनकी जगह ख़ुफ़िया एजेंसी के प्रमुख लियोन पनेटा को मिलेगी यदि सेनेट उनकी नियुक्ति को मंज़ूरी दे देती है.

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस नई प्रक्रिया का पहला कदम था ये सुनिश्चित करना कि जिन से बात हो रही है वो तालिबान के प्रभावशाली सदस्य हैं.

उनका कहना था, “हम किसी ऐसे से बातचीत नहीं करना चाहते जो छुटभैया हो.”

करज़ई ने शनिवार को कहा था अमरीका और अन्य विदेशी सेनाएँ तालिबान से बात कर रही हैं और बातचीत अच्छी हो रही हैं.

अब तक तालिबान का औपचारिक रूख यही रहा है कि वो शांति वार्ता में तभी शामिल होंगे जब अंतरराष्ट्रीय सेनाएं अफ़गानिस्तान छोड़ देंगी.

लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि वो सोच अब बदलती नज़र आ रही है.

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