'ग्रीस डुबो सकता है और देशों को भी'

ज़्यां कोद युंकर
Image caption लक्समबर्ग में ज़्यां क्लोद युंकर की चेतावनी के बीच कूटनीति तेज़ हुई

अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए भारी संख्या में की जा रही कटौतियों के विरोध में हज़ारों की संख्या में ग्रीस के लोग संसद के बाहर जमा हो गए हैं.

इन लोगों के हाथों में पोस्टर और तख्तियां हैं जिनपर लिखा है ‘चोर, देश-द्रोही और गद्दार’.

इससे पहले ग्रीस के प्रधानमंत्री ज्यॉर्ज पापेंद्रू ने संसद से कहा है कि वह नए मंत्रिमंडल के कड़े आर्थिक सुधार कार्यक्रम का समर्थन करे.

पापेंद्रू का कहना था कि क़र्ज़ की क़िस्तें अदा न कर पाने की सूरत में अगर ग्रीस को डिफ़ॉल्टर होना पड़ा, तो उसके विनाशकारी नतीजे होंगे.

इस बीच यूरोज़ोन के वित्तमंत्री रविवार से लक्समबर्ग में तीन दिन की बैठक कर रहे हैं जिसमें ग्रीस के लिए 12 अरब यूरो की रक़म दिया जाना लगभग निश्चित है.

मगर ये राशि इस शर्त के साथ दी जाएगी कि ग्रीस सरकार कड़े आर्थिक सुधारों को लागू करे.

ग्रीस को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और यूरोज़ोन से मिलने वाली 12 अरब यूरो की इस क़िस्त की सख़्त ज़रूरत है.

अगले कुछ महीनों में ग्रीस को अपने क़र्ज़ की क़िस्तें चुकानी हैं जिससे वो डिफॉल्टर बनने से बच सके.

यूरोज़ोन गुट के प्रमुख ज़्यां क्लोद युंकर ने चेतावनी दी है कि ग्रीस का क़र्ज़ संकट अपने साथ यूरोज़ोन के कम से कम पाँच और देशों को ले डूबेगा.

ग़लत संकेत

यूरो ज़ोन गुट के प्रमुख और लक्समबर्ग के प्रधानमंत्री ज़्यां क्लोद युंकर ने कहा कि अगर ग्रीस के क़र्ज़ संकट को सही ढंग से नहीं निपटाया गया तो स्पेन से भी पहले पुर्तगाल, आयरलैंड, बेलजियम और इटली भी इसकी चपेट में आ जाएंगे.

उनका कहना था कि ग्रीस के राहत पैकेज की रक़म लिए बिना यूरोपीय संघ के बैंकों से भी मदद लेना आग से खेलने के बराबर होगा.

ग़ौरतलब है कि जर्मन चांसलर अंगेला मर्केल चाहती हैं कि व्यावसायिक बैंकों को भी राहत पैकेज में योगदान करना चाहिए मगर फ़्रांस इससे सहमत नहीं था.

लेकिन अब मर्केल ने कहा है कि बैंक जो भी योगदान करना चाहें वो स्वैच्छिक होगा.

ग्रीस के संकट को लेकर फ़्रांस और जर्मनी के चिंतित होने का कारण ये है कि ग्रीस के कर्ज़ संकट से सबसे अधिक फ़्रांस और जर्मनी के बैंक जुड़े हुए हैं.

ग्रीस के कर्ज़ अदा ना कर पाने की सूरत में ये बैंक मुश्किल में पड़ जाएँगे.

समर्थन की अपील

उधर ग्रीस के प्रधानमंत्री ज्यॉर्ज पापेंद्रू ने संसद में तीन दिनों की इस बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि देश इस समय बड़े नाज़ुक संकट के दोराहे पर खड़ा है, और इस समय अंतर्राष्ट्रीय मदद को नकारने से समस्या का हल नहीं होगा.

मंगलवार को ग्रीस के सांसद विश्वास प्रस्ताव पर मतदान करेंगे.

पापेंद्रू ने ये भी वादा किया कि नए राहत पैकेज के इस्तमाल में जो भी ख़ामियां होंगी उन्हें दूर किया जाएगा.

प्रधानमंत्री पापेंद्रू के संसद में दिए इस बयान से ग्रीस के बैंको के शेयरों में तो सुधार आया लेकिन सड़कों पर लोगों का ग़ुस्सा कम नहीं हो रहा है.

लक्सममबर्ग में जहां कूटनीति की चाल तेज़ हुई है वहीं ग्रीस सरकार अपनी कड़े आर्थिक सुधार कार्यक्रमों से नाराज़ लोगों के नए विरोध प्रदर्शन से निपटने की तैयारी कर रही है.

शनिवार को भी आर्थिक सुधार कार्यक्रमों का विरोध करने के लिए एथेंस की सड़कों पर हज़ारों प्रदर्शनकारियों निकले थे.

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