इतिहास के पन्नों से..

इतिहास के पन्ने पलटें तो 21 जून के दिन ब्रिटिश गैस कंपनी के चेयरमैन की तन्ख्वाह करीब डेढ़ लाख पाउंड बढ़ाने की निंदा हुई और दूसरे विश्व युद्ध में अमरीका को अहम कामयाबी मिली.

1991: तन्ख़्वाह डेढ़ लाख पाउंड बढ़ाने पर रोश

Image caption रॉबर्ट इवान्स की तन्ख्वाह 66% बढ़ाकर 3,70,000 पाउंड कर दी गई.

ब्रिटिश गैस कंपनी के चेयरमैन की तन्ख़्वाह 2,22,000 पाउंड से बढ़ाकर 3,70,000 पाउंड करने की खूब आलोचना हुई.

ब्रिटिश गैस एक प्राइवेट कंपनी है और 1991 में इसका कोई प्रतिद्वंदी नहीं था.

लेबर पार्टी ने इस वेतन वृद्धि की निंदा करते हुए कहा कि "ये सिर्फ लालच है".

वहीं ब्रिटिश गैस कंपनी ने अपने चेयरमैन रॉबर्ट इवान्स की तन्ख्वाह के इस फैसले पर सफाई देते हुए कहा था कि ये उनके व्यापार के बेहतरीन प्रदर्शन के साथ जुड़ा है.

हालांकि उन दिनों में ऐसी वेतन वृद्धि पाने वाले रॉबर्ट इवान्स जैसे और कई मालिक भी थे.

जहां इवान्स की तन्ख़्वाह 66% बढ़ी, वहीं टेस्को के सर इयान मैकलोरिन की 330% बढ़ाई गई. इनके अलावा नैटवेस्ट बैंक के होवार्ड मैकडोनाल्ड को 60%, बास कंपनी के इयान प्रोसर को 45% और प्रूडेन्शियल के मिक न्यूमार्च को 43% वेतन वृद्धि दी गई थी.

1945: दूसरे विश्व युद्ध में अमरीका को मिली अहम कामयाबी

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Image caption इस लंबी लड़ाई में करीब 7,000 अमरीकी सैनिक मारे गए थे.

करीब तीन महीने की लड़ाई के बाद अमरीका ने जापान के ओकीनावा द्वीप पर 21 जून 1945 के दिन कब्ज़ा कर लिया.

जापान के दक्षिणी तट से 550 किलोमीटर की दूरी पर बसा ओकिनावा द्वीप अमरीकी सेना के लिए बेहद अहम था क्योंकि वहां से जापान पर हवाई और समुद्री रास्ते से हमले करना आसान है.

इस विजय की घोषणा अमरीकी सैन्य अधिकारी चेस्टर निमिट्ज़ ने की.

जैसे-जैसे अमरीकी सेना द्वीप के पास पहुंची, ऊंची चोटियों पर तैनात कई जापानी सैनिकों ने वहां से कूद कर जान दे दी. ताकि उन्हें युद्ध-बंदी ना बनाया जा सके.

हालांकि अमरीकी सेना ने 4,000 जापानी सेनिकों को युद्ध-बंदी बना लिया. एक अप्रैल को शुरू हुई इस लड़ाई में 90,000 जापानी सैनिक मारे गए.

अमरीकी सेना को पूरे द्वीप पर कब्ज़ा करने में समय लगा क्योंकि राजधानी ओकीनावा में पहाड़ और गुफाओं का फायदा उठाते हुए जापानी सेना ने उन्हें कड़ी टक्कर दी.

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