तकनीक दिखा रही है तरक्की की राह

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चीन के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल ने हमसे पूछा, "हमारा देश और शहर बनाने की योजना बना रहा, इतने जितने मानव सभ्यता में कभी नहीं बनाए गए."

दरअसल, पूरा एशिया मानव सभ्यता के सबसे बड़े शहरीकरण कार्यक्रम में लगा हुआ है.

पृथ्वी के कुल क्षेत्रफल में शहर बसे हुए हैं लेकिन उनमें दुनिया की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी रहती है. ये आबादी दुनिया की 75 प्रतिशत से अधिक ईंधन की खपत करते हैं और वे 80 प्रतिशत से अधिक कार्बन गैसों के उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेदार हैं.

हम जिस तरह से अपने शहरों को संचालित करते हैं उसी से तय होना है कि आने वाले कल में हमारी पृथ्वी की हालत कैसी रहेगी.

एशिया में जिस तरह से शहर बसाए जा रहे हैं उनमें बड़ा अंतर है. एक तरीक़ा है केंद्रीयकृत या सरकारी योजना के साथ बन रहे शहर, जैसा कि चीन में हो रहा है. दूसरा ज़मीनी स्तर पर या जनता की भागीदारी से बन रहे शहर जो ज़्यादा

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Image caption शहरों को ज़्यादा सक्षम बनाने में तकनीक की भूमिका अहम है

जैविक हैं. जैसा कि जकार्ता, बैंकॉक और मुंबई में हो रहा है.

सिंगापुर ने अपनी अलग लीग बना ली है और वह शहरीकरण की अत्याधुनिक योजनाओं के साथ प्रयोग कर रहा है और नई तकनीक की मदद से क्षमता में सुधार की कोशिश कर रहा है. उदाहरण के तौर पर उसने यातायात प्रबंधन में नए

प्रयोग किए हैं.

इसी तरह दक्षिण कोरिया अपने सर्वव्यापी शहरी योजना के तहत शहरीकरण के कार्य में सूचना तकनीक की मदद ले रहे हैं. इसमें शहर का हर हिस्सा तकनीक की मदद से ही विकसित किया जा रहा है, मसलन वायरलेस नेटवर्किंग और रेडियो फ़्रिक्वेंसी आइडेंटिटी टैग्स.

परिवर्तन

पिछले एक दशक में हमारे शहरों में परत दर परत डिजिटल डेटा बिछ गया है - टेलीकम्युनिकेशन, सेंसर नेटवर्क और स्मार्ट मीटरिंग ढाँचा. ये सब एक ऐसे होशियार तंत्र की बुनियाद है जो शहरों की क्षमता में इजाफ़ा कर सकता है.

जैसा कि हमने वर्ष 2005 में स्टॉकहोम में रोड-प्राइसिंग योजना के तहत ये दिखाया गया है कि रियल टाइम सूचनाओं के आधार पर टैफ़िक जाम को टाला जा सकता है और इससे हवा में प्रदूषण कम करने में सहायता मिल सकती है. इस

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Image caption तकनीक की मदद से ट्रैफ़िक और प्रदूषण की समस्याएँ भी हल हो रही हैं

योजना के लागू होने के बाद शहर के मध्य में सड़कों पर गाड़ियों के ठहरने के समय में 50 प्रतिशत और हवा के प्रदूषण में 15 प्रतिशत की कमी आई है.

इसी तरह के नतीजे नागरिक सेवाओं, ऊर्जा की खपत और पानी की व्यवस्था दुरुस्त करने में भी हासिल किए जा सकते हैं.

जब शहरों में जगह कम होती जा रही है तो शहरों में ढाँचागत सेवाओं को आसानी से विस्तार नहीं दिया जा सकता, ऐसे में स्मार्ट तकनीक की मदद से अपेक्षाकृत कम क़ीमत पर ज़्यादा क्षमताएँ हासिल की जा सकती हैं.

उदाहरण के तौर पर सिंगापुर ने एक मोबाइल ऐप बनाने में सहयोग करने के लिए दस करोड़ सिंगापुर डॉलर खर्च किए जिससे कि रियल टाइम डाटा का बड़े पैमाने पर उपयोग हो सके.

ऐसे समय में जब मानवीय इतिहास का सबसे बडा़ शहरीकरण कार्यक्रम चल रहा है उम्मीद तकनीक और अरबों लोगों की मौलिकता और आविष्कारशीलता पर टिकी है और उम्मीद की जा रही है कि वे ऐसा कुछ इजाद करेंगे जिससे कि बीसवीं सदी में शहरीकरण के दौरान हुई ग़लतियों की पुनरावृत्ति बड़े स्तर पर न हो.

क्या कर रहे हैं शहर
सिंगापुर वर्ष 1970 में रोड प्राइसिंग कार्यक्रम की शुरुआत की. भविष्य में शहरी योजनाओं के लिए एक शोध में शमिल.
सोंगदो, दक्षिण कोरिया कई नई नागरिक सुविधाएँ मुहैया करवाने के लिए शहर के ढाँचे में सुधार के लिए डिजिटल कनेक्शनों और प्रोसेसिंग की क्षमता को तरजीह दी.
बंगलौर, भारत 1980 के मध्य से सूचना तकनीक से जुड़े उद्योगों के व्यापक विस्तार वजह से इस शहर को सिलिकॉम वैली के नाम से जाना जाता है. यहाँ स्मार्ट बिल्डिंग टेक्नालॉजी, डायनामिक रोड स्ट्रक्चर और नवीनीकृत ऊर्जा और पानी के सदुपयोग को लेकर कई प्रयोग किए गए.
जकार्ता, इंडोनेशिया ग़रीबी, बाढ़, जनसंख्या वृद्धि, शहरी कचरे से निपटने और ट्रैफ़िक की समस्या से निपटने लिए डिजिटल टेक्नालॉजी की मदद लेने की कोशिश.
ग्वांगझाओ, चीन शहर में सूचना तकनीक के ढाँचे में सुधार और स्मार्ट ऐप के विकास के लिए रास्ता तैयार करने के लिए एक पंचवर्षीय योजना तैयार करके खासा बड़ा निवेश किया जा रहा है.

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