लीबिया में विद्रोही गुप्त बातचीत में शामिल

बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक लीबिया के पूर्व में मौ़जूद विद्रोही कर्नल गद्दाफ़ी का विरोध कर रहे है त्रिपोली के भूमिगत विरोधी गुट के साथ गुप्त बातचीत में शामिल है.

विद्रोही गुट नेशनल ट्रांसिशनल काउंसिल यानी एनटीसी के एक सदस्य ने बताया है कि वह लोग कर्नल गद्दाफ़ी को सत्ता से हटाने की तैयारी करने के लिए गुप्त बातचीत कर रहे हैं.

इस सदस्य का कहना है कि ये बातचीत स्काइप और सैटेलाइट फोन के ज़रिए की जा रही है.

विद्रोही ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि नैटो की हवाई कार्रवाई की वजह से कितना दवाब पड़ा है और साथ ही ये भी इससे मनोबल पर कितना असर पड़ा है.

दूसरी ओर वह राजधानी त्रिपोली में भूमिगत हुए विद्रोहियों को भी अपनी रणनीति में शामिल करना चाहते है ताकि कर्नल गद्दाफ़ी को गद्दी से हटाया जा सके.

ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि ताकि अगर भविष्य में फिर से विद्रोही राजधानी में सड़क पर उतरने का साहस करते है तो ऐसा बड़े स्तर पर किया जा सके.

संपर्क

इस बातचीत को त्रिपोली फाइव के नाम से पुकारा जा रहा है.ये पांच सदस्य एनटीसी के है और इन लोगों का बेनगाज़ी पर कब्ज़ा है.ये लोग हर रात त्रिपोली में 100 से ज़्यादा लोगों से संपर्क साधते हैं.

इनका मानना है कि उन्होंने कर्नल गद्दाफ़ी की तरफ़ से निगरानी रखने की कोशिशों से बचने की राह निकाल ली है.

एनटीसी के सदस्य अलमिन बेलहज़ का कहना है कि स्काइप और सैटेलाइट और के ज़रिए सीधा संवाद करना काफ़ी सुरक्षित होता है क्योंकि अभी तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है.

उनका कहना था, "हम हर रात एक घंटे के लिए बातचीत करते हैं.इस नेटवर्क के ज़रिए हम समाज के हर तबके से संपर्क साधने की कोशिश करते है और वह हमें बताते है कि उनके दोस्त क्या सोच रहे है या फिर मस्जिदों और गलियों में क्या-क्या कहा जा रहा है."

बेलहज़ इस गुप्त नेटवर्क को चलाने में मदद कर रहे है.वह एक समय में लीबिया में प्रतिबंधित पार्टी रही मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्य थे और तीस सालों से विपक्ष में थे.पहले वह त्रिपोली में रहते थे लेकिन बाद में वह देश से बाहर ब्रिटेन के मेनचस्टर शहर में रहने लगे.

उनका कहना था, "हमारे पास भूमिगत होकर काम करने का काफ़ी अनुभव है.तीस सालों में इसमें कभी घुसपैठ नहीं हुई."

कमज़ोर

बेलहज़ का मानना है कि ऐसे संकेत मिल रहे है कि जो लोग कर्नल गद्दाफ़ी का विरोध कर रहे है उनका डर लगातार कम होता जा रहा है और त्रिपोली में नेतृ़त्व कमज़ोर पड़ रहा है.

Image caption नेटो सेना की कार्रवाई का ख़ामियाज़ा वहां आमनागिरकों को भी भुगतना पड़ा है

उनके मुताबिक ये भी रिपोर्ट आ रही है कि सड़को पर गद्दाफ़ी समर्थित सेना की तैनाती में भी कमी आ रही है.

उनका कहना है, " हमारा 100 फीसदी मानना है कि त्रिपोली में विद्रोह होगा लेकिन सिर्फ़ सही समय का इंतज़ार है."

इस समय विद्रोही नेत़ृत्व ये उम्मीद कर रहा है कि त्रिपोली के भूमिगत नेताओं से हो रही उनकी बातचीत से बेहतर समन्वय पैदा होगा ताकि दक्षिण,पश्चिम और पूर्व से गद्दाफ़ी की सेना को हटाने के लिए एक पूर्वनियोजित सैन्य कार्रवाई की जा सके.

लेकिन वहीं इस बीच इस पर भी योजना बनाई जा रही कि ख़ून ख़राबे को कैसे कम किया जा सके.

बेलहज़ को लगता है कि कर्नल गद्दाफ़ी कुछ और योजना बना रहे है.

उन्होंने कहा, "हम गद्दाफ़ी समर्थकों से डरे हुए है. हमारे पास एक समग्र योजना होनी चाहिए ताकि अगर गद्दाफ़ी पद से हटते है, तो उसके बाद कैसे हालात हो सकते है उससे निपटा जा सके."

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