'मिल कर करेंगे आतंकवाद का सामना'

Image caption राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने एक बार फिर अमरीका पर निशाना साधा

ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान ने आतंकवाद का मिल कर सामना करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है.

तेहरान में आतंकवाद के मुद्दे पर आयोजित सम्मेलन में तीनों देशों के राष्ट्रपति ने एक साझा बयान में आतंकवाद से मिल कर निपटने के वायदे के साथ-साथ क्षेत्र में विदेशी सैनिक हस्तक्षेप का विरोध भी किया है.

तीनों पड़ोसी देशों का मानना है कि विदेशी सैनिक हस्तक्षेप 'इस्लाम की भावना और क्षेत्र की शांति केंद्रित सांस्कृतिक परंपराओं के प्रतिकलू है.'

दो दिवसीय बैठक के उदघाटन भाषण में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने स्वीकार किया कि उनकी सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद उग्रवाद की समस्या गंभीर होती जा रही है. करज़ई के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान के साथ-साथ क्षेत्र में अन्य कई इलाक़ों में आतंकवाद का प्रसार हुआ है.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा, "आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता."

अमरीका पर निशाना

मेज़बान देश ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने इस अवसर का इस्तेमाल एक बार फिर अमरीका पर निशाना साधने में किया. उन्होंने कहा कि अमरीका ने 9/11 के हमलों को क्षेत्र में अमरीकी सैनिक तैनात करने के बहाने के रूप में इस्तेमाल किया है.

अहमदीनेजाद ने एक बार फिर 11 सितंबर के हमलों को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूरोप में यहूदियों के दमन जैसा कथित झूठ क़रार दिया.

उन्होंने कहा, "यदि होलोकास्ट और 11 सितंबर का ब्लैकबॉक्स खोला जाए तो सच्चाइयाँ सामने आ जाएंगी. लेकिन दुर्भाग्य से अंतरराष्ट्रीय माँग के बावजूद अमरीका सरकार सच्चाई सामने नहीं आने दे रही है."

ईरानी राष्ट्रपति ने क्षेत्र में आतंकवाद की समस्या के लिए मुख्य रूप से अमरीका, इसराइल और यूरोपीय देशों को ज़िम्मेवार ठहराया.

आतंकवाद विरोधी सम्मेलन में ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के अलावा इराक़, सूडान और ताजिकिस्तान के नेताओं ने भी भाग लिया. इन देशों के अगली बैठक इस साल के अंत में इस्लामाबाद में होगी.

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