'आत्मघाती हमले में बच्ची का इस्तेमाल'

अफ़गानिस्तान (फ़ाइल फ़ोटो)

उरुज़गान सूबे में हुई घटना

अफ़गान सरकार का कहना है कि दक्षिणी अफ़गानिस्तान में पुलिस पर हमला करने के लिए चरमपंथियों ने आठ साल की जिस लड़की का इस्तेमाल किया था, उसकी धमाके में मौत हो गई है.

अफ़गानिस्तान के गृह मंत्रालय के मुताबिक़ चरमपंथियों ने लड़की को एक पैकेट दिया और कहा कि वो उसे लेकर पुलिस की गाड़ी तक जाए. जैसे ही लड़की पुलिस की गाड़ी तक पहुंची चरमपंथियों ने रिमोट कंट्रोल से उसमें धमाका कर दिया.

उरुज़गान सूबे में हुई इस घटना में और किसी की मौत नहीं हुई है.

ये घटना देश के पूर्वी हिस्से में एक अस्पताल पर हुए चरमपंथी हमले के एक दिन बाद हुई है. इसमें कम से कम 38 लोग मारे गए थे और दर्जनों लोग ज़ख़्मी हो गए थे.

अस्पताल में पर हुए हमले में मारे गए लोगों में बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएं और बच्चे शामिल थे.

उरुज़गान सूबे में बच्ची की मौत के बाद गृह मंत्रालय द्वारा जारी बयान में इसे अपराधिक और शर्मनाक कार्रवाई बताया गया है.

कोई क़द्र नहीं

सच्चे दिलवाली मासूम बच्ची उनकी बात मान बैग लेकर पुलिस की गाड़ी तक चली गई. जैसे ही वो पुलिस की गाड़ी तक पहुंची दुश्मनों ने रिमोट कंट्रोल से धमाका कर दिया जिससे बच्ची की मौत हो गई

अफ़गान गृह मंत्रालय

बयान में कहा गया है,''सच्चे दिलवाली मासूम बच्ची उनकी बात मान बैग लेकर पुलिस की गाड़ी तक चली गई. जैसे ही वो पुलिस की गाड़ी तक पहुंची दुश्मनों ने रिमोट कंट्रोल से धमाका कर दिया जिससे बच्ची की मौत हो गई.''

घटना वाले चार चेनो ज़िले के गवर्नर ने बीबीसी को बताया कि बच्ची नज़दीक के गांव की रहनेवाली थी.

गवर्नर ने बताया कि लड़की से कहा गया था कि उसे कुछ नहीं होगा.

उन्होंने ये भी कहा कि इस घटना को अंजाम देने वालों की कोई सीमा नहीं और न ही उन्हें किसी बात की क़द्र ही है.

अफ़गानिस्तान में बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि चरमपंथियों ने आत्मघाती हमलों को अंजाम देने के लिए हाल के दिनों में वयस्क महिलाओं और बच्चों की भर्ती की है. हालांकि तालिबान ने बच्चों की भर्ती किए जाने से इनकार किया है.

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