'भविष्य में नहीं ली जाएगी नागरिक समाज की राय'

कपिल सिब्बल
Image caption प्रधानमंत्री और न्यायधीशों को लोकपाल के दायरे में लाने के मुद्दे पर नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच ठनी हुई है.

लोकपाल विधेयक बनाने की प्रक्रिया में नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच चल रहे मतभेदों के बीच केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि भविष्य में क़ानून बनाने के लिए नागरिक समाज की राय नहीं ली जाएगी.

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि लोकपाल विधेयक बनाने के लिए गठित की गई सरकार और नागरिक समाज के सदस्यों की संयुक्त समिति को भविष्य के लिए उदाहरण के तौर पर नहीं देखा जा सकता.

उन्होंने कहा, “ऐसी स्थिति में सरकार ने खुली आंखों से फ़ैसला लिया, लेकिन इसकी मतलब ये नहीं है कि इसे हम भविष्य के लिए एक उदाहरण के तौर पर देखें. सरकार की स्थिति ऐसी थी कि उसे ऐसा करना पड़ा.”

कपिल सिब्बल का कहना है कि राजनीतिक पार्टियों और नागरिक समाज से सलाह मश्वरा करने के बाद लोकपाल बिल के मसौदे में कुछ और बदलाव किए जाएंगें.

जब उनसे पूछा गया कि अगर भविष्य में कोई अन्य कार्यकर्ता क़ानून बनवाने के लिए सरकार पर ज़ोर डालेगा, तो क्या सरकार झुक जाएगी, तो उनका कहना था कि ये एक विशेष मुद्दा था जिसे आगे जाकर दोहराया नहीं जाएगा.

सरकार इस मुद्दे पर तीन जुलाई को राजनीतिक पार्टियों के साथ एक बैठक करने वाली है जिसमें नागरिक समाज के साथ मिलकर बनाए गए लोकपाल के मसौदे पर चर्चा की जाएगी.

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री और न्यायधीशों को लोकपाल के दायरे में लाने के मुद्दे पर नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच ठनी हुई है.

कपिल सिब्बल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोकपाल विधेयक का मसौदा अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है और अंतिम मसौदे में कुछ बदलाव किए जाएंगें.

सिविल सोसाईटी यानि नागरिक समाज का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने कहा है कि वे इस मुद्दे पर 16 अगस्त से आमरण अनशन शुरू करेंगे और अनशन से तब तक नहीं उठेंगे जब तक सरकार लोकपाल बिल पर नागरिक समाज की पूरी बात नहीं मान लेती.

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