प्रभु दयाल के समर्थन में रैली

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न्यूयॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूत प्रभु दयाल अपनी नौकरानी की ओर से लगाए गए ग़ुलामी कराने जैसे आरोपों का अदालत में जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं.

जबकि न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी के इलाक़े में रहने वाले कुछ भारतीय मूल के लोगों ने उनके समर्थन में एक प्रदर्शन किया है.

न्यूयॉर्क के सिटी हॉल की इमारत के बाहर क़रीब एक सौ भारतीय मूल के अमरीकियों ने बड़ी गर्मजोशी से प्रभु दयाल के समर्थन में प्रदर्शन किया और उनके निर्दोष होने की गवाही देने को सभी आतुर दिखे.

इनमें से बहुत से लोग तो यहाँ तक कहने लगे कि प्रभु दयाल पर आरोप लगाने वाली महिला संतोष भारद्वाज को फ़ौरन अमरीका से निकाल दिया जाना चाहिए.

वह इसलिए क्योंकि इन लोगों को विश्वास ही नहीं आ रहा है कि प्रभु दयाल पर ऐसे आरोप किस प्रकार लगाए जा सकते हैं. अमरीका में भारतीय मूल के लोगों की संस्था फ़ेडेरेशन ऑफ़ इंडियन असोसिएशंस के पूर्व अध्यक्ष नीरव मेहता मानते हैं कि संतोष भारद्वाज के सारे आरोप गलत हैं.

'ग़लत आरोप'

मेहता कहते हैं, "हमे पूरा यक़ीन है कि प्रभु दयाल बिल्कुल निर्दोष हैं और उनके ख़िलाफ़ ग़लत आरोप लगाए गए हैं. वह बहुत ही भले इंसान हैं और हममें से कोई भी ऐसा नहीं है जो उनके स्नेह से अछूता हो. अब भारतीय विदेश मंत्रालय भी प्रभु दयाल जी का साथ दे रहा है और हमें विश्वास है कि अदालत में उनके ख़िलाफ़ सारे आरोप रद्द कर दिए जाएंगे."

प्रभु दयाल के समर्थन में होने वाली इस रैली में आरोप लगाने वाली महिला के ख़िलाफ़ और मुक़दमे के बारे में कई प्रकार के विचार सुनने को मिले.

कोई कहता है कि आरोप लगाने के पीछे अमरीका का ग्रीन कार्ड हासिल करना मकसद है तो कोई कहता है कि नौकरानी संतोष भारद्वाज प्रभु दयाल से इसी बहाने पैसे ऐंठना चाहती हैं.

कुछ लोगों का कहना है कि अमरीका के क़ानून का दुरुपयोग किया जा रहा है और संतोष भारद्वाज अमरीका में इस मुक़दमे के ज़रिए आसानी से अमीर बनने के ख़्वाब देख रही हैं.

स्वाति वैष्णव भी इस रैली में शामिल थीं, वह कहती हैं कि यह आरोप बिल्कुल निराधार हैं और पैसे के लालच में लगाए गए हैं.

स्वाति कहती हैं, "मैं प्रभु दयाल को अच्छी तरह जानती हूँ और यह आरोप बिल्कुल ग़लत है. मैं समझती हूँ कि इस महिला ने पैसे के लिए यह आरोप लगाए हैं और लगता है कि वह अपने परिवार को अमरीका बुलाना चाहती है. इसलिए भी यह सब कर रही है. अगर यह आरोप सही होते तो उन्हें तो फ़ौरन लगाना चाहिए था, उन्होंने इतना समय क्यों लिया."

प्रदर्शन

प्रदर्शन में आने वालों में कई लोग घंटों का सफ़र तय करके दूर दराज़ के इलाक़ों से भी आए थे. इन्हीं में एक 80 साल के भीखू भाई पटेल भी थे जिन्होंने कुर्ता पायजामा पहना हुआ था और सिर पर सफेद टोपी लगा रखी थी.

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Image caption 80 साल के भीखूभाई पटेल भी रैली में शामिल हुए

वह भी बड़े जोश से प्रभु दयाल की हिमायत में बोले. उनका दावा था कि अमरीका में रहने वाला भारतीय समुदाय किसी भी तरह प्रभु दयाल को अकेला नहीं छोड़ सकता.

वह बोले, "हम यह मानते हैं कि प्रभु दयाल सारे भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं और अगर उनको न्याय नहीं मिलता तो मानो भारत को न्याय नहीं मिला. इसलिए हम यहाँ जमा हुए हैं कि उनको न्याय दिलाने की मांग करें और सारा भारतीय समुदाय उनके लिए न्याय की मांग करता है."

अपने जीवन के आठवें दशक में पैर रखने के बाद अब भी भीखू भाई एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं. उनका कहना है कि उन्होंने जब भी प्रभु दयाल को किसी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की तरह बुलाया तो वह उसमें ज़रूर आए.

गैर भारतीय अमरीकी नेताओं में से सिर्फ़ एक न्यूयॉर्क राज्य के सीनेटर जॉन सैंपसन ने थोड़ी देर की शिरकत की और प्रभु दयाल के लिए अपना समर्थन दर्ज कराया. उनका कहना था कि अदालत में सच्चाई सामने आ जाएगी.

लेकिन जानकारों का कहना है कि इस प्रकार के प्रदर्शन का अदालत में चलने वाले मुक़दमे पर ज़्यादा असर नहीं पड़ता है. और वहां तो सबूत के आधार पर ही मामला परखा जाएगा.

मुक़दमा

45 वर्षीय संतोष भारद्वाज ने न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में मुक़दमा दायर किया है, जिसमें प्रभु दयाल के साथ उनकी पत्नी चांदनी दयाल औऱ बेटी अकांक्षा दयाल का नाम भी शामिल किया गया है.

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Image caption प्रभु दयाल ने पत्रकारों को अपनी नौकरानी का कमरा दिखाया

अदालती दस्तावेज़ में कहा गया है कि क़रीब एक साल तक दयाल परिवार ने संतोष को रोज़ाना, हफ़्ते के सातों दिन, करीब 15 घंटों तक घर का काम करने पर मजबूर किया और उसको पैसा भी बहुत कम दिया जाता था.

संतोष का कहना है कि उनके काम के बदले में उनके हाथ में कोई पैसा नहीं दिया जाता था बल्कि भारत में उसके बैंक खाते में महीने भर में कुल 300 डॉलर की दर से पैसे जमा करा दिए जाते थे, जो एक डॉलर प्रति घंटे की दर से भी कम है.

जबकि न्यूयॉर्क में सरकारी क़ानून के मुताबिक़ किसी को भी किसी भी प्रकार के काम के लिए साढ़े सात डॉलर प्रति घंटे की दर से मेहनताना दिया जाना ज़रूरी है. इसके अलावा दस्तावेज़ के मुताबिक उन्हें एक छोटे से स्टोर में ही सोना पड़ता था.

संतोष का कहना है कि इस साल के शुरू में वह एक दिन मौक़ा देखकर घर से भाग गई, जब प्रभु दयाल किसी मीटिंग में व्यस्त थे और उनकी पत्नी कमरे में सो रही थीं. और उनके भागने में कथित तौर पर एक सुरक्षा गार्ड ने भी मदद की थी.

अब संतोष भारद्वाज हर्जाना दिए जाने की मांग कर रही हैं.

इनकार

लेकिन प्रभु दयाल इन सारे आरोपों से सिरे से इनकार करते हैं. उन्होंने पत्रकारों को अपने घर का दौरा कराया और वह कमरा भी दिखाया जहां संतोष रहा करती थी. उस कमरे में टीवी, फ़ोन के साथ-साथ आरामदेह बिस्तर और सोफ़े भी लगे हुए थे. और साथ में ही अटैच बाथरूम भी था.

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Image caption दयाल परिवार के वकील रवि बत्रा ने रैली का संचालन किया

अब प्रभु दयाल औऱ उनके परिवार को अदालत के सम्मन हासिल हो गए हैं और उन्हे 20 दिनों के भीतर जवाब देना है.

प्रभु दयाल के परिवार के वकील रवि बत्रा ने इस रैली का संचालन किया था. उनका कहना था कि समुदाय के लोगों ने उनसे इस प्रदर्शन को आयोजित करने की ज़िद की. इसलिए उन्होंने इसका आयोजन किया.

बत्रा कहते हैं कि उन्होंने अमरीकी होमलैंड सिक्यूरिटी सचिव जेनट नपोलिटानो और अमरीकी अटार्नी जनरल एरिक होल्टर को भी पत्र लिखकर यह मांग की है कि आरोप लगाने वाली महिला अमरीका में ग़ैर क़ानूनी तौर पर रह रही है. इसलिए उसे अमरीका से निकाल दिया जाना चाहिए.

संतोष भारद्वाज का पासपोर्ट वर्ष 2010 में ही रद्द कर दिया गया था और उनके पास अमरीका में रहने के लिए वैध दस्तावेज़ नहीं हैं.

लेकिन अमरीकी विदेश मंत्रालय ने प्रभु दयाल के मामले में हस्तक्षेप करने से यह कहकर इनकार कर दिया है कि यह तो क़ानूनी मामला है.

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