कटौती के ख़िलाफ़ ग्रीस में हड़ताल

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Image caption हड़ताल का काफ़ी असर दिखाई दे रहा है

ग्रीस में सरकार के कटौती प्रस्तावों के ख़िलाफ़ ट्रेड यूनियनों ने 48 घंटे की हड़ताल शुरु कर दी है.

राजधानी एथेंस में हज़ारों हज़ार प्रदर्शनकारी जमा हुए हैं, प्रदर्शन मोटे तौर पर काफ़ी शांतिपूर्ण रहा है लेकिन कुछ स्थानों पर पुलिसकर्मियों और क्रुद्ध प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव भी हुआ है, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस के गोले भी छोड़े गए हैं.

प्रधानमंत्री जॉर्ज पापाएंद्रु का कहना है कि 28 अरब यूरो की कटौती के अलावा ग्रीस को संकट से बचाने का कोई और रास्ता नहीं है.

कल संसद में प्रधानमंत्री पापाएंद्रु की आपातकालीन मध्यावधि आर्थिक योजना पर मतदान होने वाला है, अगर वे अपनी योजना के लिए संसद में पर्याप्त समर्थन हासिल नहीं कर पाते हैं तो ग्रीस का संकट और गहरा सकता है.

प्रधानमंत्री पापाएंद्रु ने सांसदों को देशभक्ति का वास्ता दिया है और कहा है कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मतदान करें.

प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि अपनी अंतर्रात्मा की आवाज़ सुनिए, अपने भीतर बैठे देशभक्त की बात मानिए. कल होने वाला मतदान देश को अपने पैरों पर खड़े रखने का एकमात्र अवसर है."

लेकिन इस कटौती के ख़िलाफ़ उभरी जनभावना को नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं होगा, ख़ास तौर पर विपक्षी नेताओं के लिए.

ग्रीस में हुए जनमत सर्वेक्षण बताते हैं कि देश की 70 से 80 प्रतिशत जनता जॉर्ज पापाएंद्रु की कटौती योजना के ख़िलाफ़ है, मगर समस्या ये है कि अगर प्रधानमंत्री की कटौती योजना संसद से पारित नहीं होती है तो यूरोपीय संघ और अंतररराष्ट्रीय मुद्रा कोष ग्रीस को कर्ज़ की अगली किस्त देने से मना कर सकते हैं.

भारी विरोध

वामपंथी रुझान वाली विपक्षी पार्टी साइरिज़ा के नेता एक्लिस सिपराज़ ने कहा है कि देशभक्ति का तकाज़ा यही होगा कि लोग कटौती प्रस्ताव के पक्ष में नहीं.

सिपराज़ ने कहा, "आप देशभक्ति का हवाला देकर सांसदों को आतंकित नहीं कर सकते, अगर आज हमें किसी पर गर्व होना चाहिए तो वो ग्रीक नागरिक हैं जो देश के हितों की रक्षा के लिए, देशभक्ति की ही वजह से सड़कों पर अपने सारे मतभेद भुलाकर इक्ट्ठा हुए हैं. प्रधानमंत्री जिस मध्यावधि योजना पर समर्थन माँग रहे हैं, उसके पक्ष में वोट देना तो दूर की बात है, उसे पढ़कर सिर्फ़ शर्मिंदगी ही होती है."

संसद में प्रधानमंत्री की योजना पारित हो पाएगी या नहीं, कहना मुश्किल है क्योंकि जॉर्ज पापाएंद्रु की समाजवादी पार्टी पासोक में भी विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं. सत्ताधारी पार्टी का बहुमत बहुत मामूली है इसलिए प्रधानमंत्री की योजना संसद में पिट भी सकती है, 300 सदस्यों वाली संसद में सत्ताधारी दल के पास सिर्फ़ 155 सदस्य हैं.

ग्रीस में आम हड़ताल की वजह से जनजीवन और सार्वजनिक सेवाएँ बिल्कुल ठप हो गई हैं, बैंक और अस्पताल तक इससे प्रभावित हुए हैं. .

ग्रीस की आर्थिक मुसीबतों की शुरूआत 2004 के एथेंस ओलंपिक खेलों के बाद से हुई जब देश की सरकार ने कर्ज़ के पैसों से कई बड़ी योजनाएँ शुरू कीं, ग्रीस ने 2002 में अपनी मुद्रा द्राख्मा को छोड़कर साझा मुद्रा यूरो को अपनाया था.

ग्रीस की आर्थिक पस्तहाली का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह पहले 110 अरब यूरो का कर्ज़ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और यूरोपीय संघ से ले चुका है और अब उसे कर्ज़ की दूसरी किस्त चाहिए.

यूरोपीय देश चिंतित हैं कि अगर ग्रीस कर्ज़ चुकता नहीं कर पाया तो पूरी साझा यूरोपीय मुद्रा ही संकट में घिर सकती है. पुर्तगाल और आयरलैंड पहले ही इसी तरह के संकट से जूझ रहे हैं.

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