'गद्दाफ़ी के ख़िलाफ़ वारंट मंज़ूर नहीं'

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Image caption कर्नल गद्दाफ़ी और उनके बेटे सैफ़-अल-इस्लाम के ख़िलाफ़ आईसीसी ने वारंट जारी किए हैं

लीबिया ने कर्नल गद्दाफ़ी के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत की ओर से जारी किया गया वारंट ख़ारिज कर दिया है.

लीबिया के क़ानून मंत्री के मुताबिक आईसीसी के पास ऐसे फै़सले का अधिकार नहीं है.

त्रिपली में एक संवाददाता सम्मेलन में क़ानून मंत्री मोहम्मद-अल-कमूदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत (आईसीसी) 'पश्चिमी देशों का एक हथियार है जिससे वह तीसरी दुनिया के देशों के नेताओं के ख़िलाफ़ कदम उठाते हैं'.

कमूदी ने कहा, “कर्नल गद्दाफ़ी और उनका बेटा लीबिया की सरकार में किसी ओहदे पर नहीं हैं, इसलिए उनका आईसीसी की ओर से लगाए गए आरोपों से कोई संबंध नहीं है.”

आईसीसी ने कर्नल गद्दाफ़ी को मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों का आरोपी बताते हुए सोमवार को ये वारंट जारी किया था.

गद्दाफ़ी के अलावा अदालत ने उनके बेटे सैफ़-अल-इस्लाम और खुफिया प्रमुख अब्दुल्लाह-अल-सनूसी के ख़िलाफ़ भी वारंट जारी किए.

‘पर्याप्त वजह’

अदालत ने कहा कि उसके पास ये मानने की पर्याप्त वजहें हैं कि गद्दाफ़ी ने लीबिया में चार महीनों से चल रहे जन-विद्रोह में आम जनता पर हमले करने के आदेश दिए थे.

आईसीसी के मुताबिक, लीबिया के नेता के तौर पर कर्नल गद्दाफ़ी का देश पर पूरा नियंत्रण था.

उन्होंने ही जन-विद्रोह को हर हाल में दबाने के लिए बल-प्रयोग की नीति के इस्तेमाल की अनुमति दी थी.

उनके बेटे सैफ़-अल-इस्लाम के पास कोई आधिकारिक ओहदा ना होते हुए भी वो गद्दाफ़ी के नज़दीकी लोगों में ‘सबसे प्रभावशाली’ माने जाते थे.

अदालत ने कहा कि अब्दुल्लाह-अल-सनूसी ने ‘अप्रत्यक्ष तरीके से सैन्य बलों को बेंगाज़ी शहर में प्रदर्शनकारियों पर हमला” करने के आदेश दिए थे’.

बाग़ियों ने किया स्वागत

बाग़ियों का गढ़ माने जाने वाले बेनगाज़ी शहर और सैन्य हमलों की मार झेलने वाले मिस्राता शहर की सड़कों पर, आईसीसी के ऐलान पर खुशी ज़ाहिर करने के लिए हवा में गोलियां चलाई गईं.

बागियों की ट्रांजिशनल नेशनल काउंसिल के इब्राहिम डब्बाशी ने अदालत के फै़सले का स्वागत किया और कहा कि गद्दाफ़ी के क़रीबियों को अब उन पर शासक की गद्दी छोड़ने का दबाव बनाना चाहिए.

बीबीसी के न्यूज़आवर कार्यक्रम में डब्बाशी ने कहा, “जो गद्दाफ़ी के साथ काम कर रहे हैं, वो ये ना भी मानें कि वो एक अपराधी हैं, लेकिन इतना तो जानते हैं कि वो एक संदिग्ध अपराधी हैं.”

नैटो के महासचिव ऐन्डर्स फॉग रासमुसेन समेत नैटो के सहयोगी देश, फ़्रांस, ब्रिटेन और अमरीका की सरकारों ने भी आईसीसी के फैसले का स्वागत किया है.

बीबीसी के मार्क डॉयल के मुताबिक इस बीच बाग़ी सेनाएं त्रिपोली के और क़रीब आ गई हैं.

बाग़ी सेना के साथ चल रहे डॉयल ने बताया कि उन्होंने नए रॉकेट लॉन्चर्स और हथियारों से लैस साफ़ यूनिफॉर्म पहने बाग़ी सैनिकों के कई ट्रक देखे हैं जिससे उन्हें लगता है कि इस इलाके की लड़ाई में बाग़ी सेनाओं की तैयारी सबसे बेहतर है.

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