ग्रीस: कटौती प्रस्ताव पर मतदान

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Image caption कटौती प्रस्ताव के खिलाफ मंगलवार को हुए प्रदर्शन में पुलिस के साथ झड़पों में कई लोग घायल हो गए.

ग्रीस की संसद में बुधवार को 28 अरब यूरो के आर्थिक कटौती के प्रस्ताव पर मतदान होगा.

इस प्रस्ताव के बुधवार और गुरुवार को दो अलग-अलग मतदान प्रक्रियाओं में पारित होने के बाद ही यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ग्रीस को 110 अरब यूरो की और आर्थिक मदद देंगे. इससे ग्रीस वर्ष 2014 तक का अपना कर्ज़ा चुका पाएगा.

एक अनुमान के मुताबिक ग्रीस की 80% जनता कटौती के ख़िलाफ़ है. पिछले महीनों में ग्रीस में बेरोज़गारी 16% तक पहुंच गई है.

मंगलवार को कटौती के इस प्रस्ताव का विरोध करने के लिए ट्रेड यूनियनों ने 48 घंटे की देशव्यापी हड़ताल बुलाई थी और राजधानी एथंस में विशाल प्रदर्शन निकाला.प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया था. इस दौरान भड़की हिंसा में 37 पुलिसकर्मियों समेत 46 लोग घायल हुए थे.

यूनियनों का मानना है कि सरकार के कटौती प्रस्ताव के लागू होने से न्यूनतम वेतन पाने वाले लोगों को भी कर चुकाना पड़ेगा.

यूरोपीय संघ में चिंता

यूरोपीय संघ के प्रमुख हर्मन वैन रोम्पुए के मुताबिक ग्रीस के मतदान का असर पूरे विश्व पर पड़ेगा.

एथंस में बीबीसी संवाददाता क्रिस मौरिस के मुताबिक अगर ग्रीस में आर्थिक प्रस्ताव पारित नहीं होता है तो पहली बार यूरोज़ोन के किसी सदस्य देश के अपने ऋण को ना चुका पाने की आशंका पैदा होगी.

मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की नई प्रमुख क्रिसटीन लगार्द ने ग्रीस के राजनेताओं से एकजुट होने की अपील की और कहा, “विपक्ष को सत्ताधारी पार्टी के साथ आना चाहिए क्योंकि देश का भविष्य इस पर निर्भर है.”

हाल में नियुक्त ग्रीस के वित्त मंत्री ने इवैन्जलॉस वेनिज़ेलोस ने माना है कि कटौती अन्यायपूर्ण है लेकिन ये भी कहा कि ये बेहद ज़रूरी है.

लेकिन विपक्ष के नेता, ऐन्टोनिस सामरास ने कहा है कि आर्थिक कटौती के पीछे की सोच ग़लत है और अर्थव्यवस्था में तेज़ी लाने के लिए कर की दरों को बढ़ाने की बजाय घटाना चाहिए.

प्रधानमंत्री जॉर्ज पापेंद्रू का कहना है कि 28 अरब यूरो के उनके कटौती प्रस्ताव के ज़रिए ही ग्रीस आर्थिक संकट से बाहर निकल सकता है.

लेकिन उनकी सरकार में शामिल समाजवादी पार्टी पासोक ही इस प्रस्ताव का विरोध कर रही है. इस पार्टी के दो सांसद है.

सत्ताधारी पार्टी का बहुमत बहुत मामूली है 300 सदस्यों वाली संसद में सत्ताधारी दल के पास सिर्फ़ 155 सदस्य हैं.

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