डेवी पर प्रत्यर्पण याचिका नामंज़ूर

पीटर ब्लीच (फ़ाइल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption वर्ष 2004 में राष्ट्रपति ने पीटर ब्लीच की सज़ा माफ़ कर दी थी

पुरुलिया में हथियार कांड के मुख्य अभियुक्त किम डेवी को भारत प्रत्यर्पित किए जाने के मामले में डेनमार्क की अदालत ने याचिका नामंज़ूर कर दी है. यानी अब डेवी को भारत प्रत्यर्पित नही किया जा सकेगा.

इसे सीबीआई के लिए धक्का माना जा रहा है. हालांकि किम डेवी के प्रत्यार्पण के मामले में सीबीआई की कोई भूमिका नहीं है. ये मामला किम डेवी और डेनमार्क की सरकार के बीच है. सीबीआई ने इस मामले में सहयोग के लिए एक टीम भेजी है.

डेनमार्क हाईकोर्ट में ये मामला किम डेवी लेकर गए हैं. उन्होंने अपने आपको भारत प्रत्यर्पित करने के डेनमार्क सरकार के फ़ैसले को चुनौती दी थी.

इससे पहले डेनमार्क सरकार ने दो शर्तों के आधार पर किम डेवी भारत को प्रत्यर्पित करने की मंज़ूरी दी थी. एक तो ये कि किम डेवी को फाँसी नहीं दी जाएगी और दूसरे अगर उन्हें सज़ा दी जाती है तो वे ये सज़ा डेनमार्क में काटेंगे.लेकिन किम डेवी ने सरकार के इस फ़ैसले को अदालत में चुनौती दे दी थी.

वर्ष 1995 में पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में हथियार गिराए जाने के मामले की जाँच भारत के केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीबीआई) ने की थी.

हालांकि हाईकोर्ट का फ़ैसला अंतिम फ़ैसला नहीं है क्योंकि फ़ैसला चाहे जो भी आए डेनिश क़ानून के अनुसार दोनों पक्षों को सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार होगा.

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