भ्रष्टाचार पर चीन भी चिंतित

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चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की 90वीं वर्षगाँठ पर चेतावनी दी है कि पार्टी में व्याप्त भ्रष्टाचार की वजह से लोगों का भरोसा ख़त्म हो सकता है.

वर्षगाँठ मनाने के लिए एकत्रित हुए पार्टी के नेताओं और सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "भ्रष्टाचार का मूल्य पार्टी को जनता का समर्थन और भरोसा खोकर चुकाना पड़ सकता है."

उन्होंने कहा है कि कम्युनिस्ट पार्टी को चीनी गुणधर्मों के साथ साम्यवाद का पालन करके ही साम्यवाद का आधुनिकीकरण किया जा सकता है और लोगों के जीवन में सुधार लाया जा सकता है.

कम्युनिस्ट पार्टी की 90वीं वर्षगांठ के अवसर पर चीन में कई आयोजन किए जा रहे हैं.

कम्युनिस्ट पार्टी के शासन काल में चीन की अर्थव्यवस्था हालांकि तेज़ी से फल-फूल रही है लेकिन राजनीतिक विरोध को कुचलने के चीन के तरीक़ों पर सवाल भी बहुत खड़े हुए हैं.

आयोजन

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Image caption हू जिंताओ ने साम्यवाद के आधुनिकीकरण का भी आह्वान किया है

कई बड़े आयोजन किए गए हैं और टेलीवज़न पर विशेष कार्यक्रम चल रहे हैं.

एक ऐतिहासिक और राष्ट्रभक्ति से भरी एक फ़िल्म रिलीज़ की गई है जिसमें चीन के कई बड़े कलाकारों ने अभिनय किया है.

सरकार की ओर से एक इतिहास की एक नई किताब जारी की गई है और देश में कई प्रदर्शनियाँ चल रही हैं.

इस अवसर को ध्यान में रखते हुए ही चीन ने एक दिन पहले यानी गुरुवार को बीजिंग से शंघाई के बीच एक बुलेट ट्रेन शुरु की है. ये ट्रेन इन दोनों शहरों के बीच की लगभग 1300 किलोमीटर की दूरी पाँच घंटे से भी कम समय में पूरी कर लेती है.

दुनिया का सबसे लंबा पुल भी गुरुवार को ही यातायात के लिए खोल दिया गया है. समुद्र पर बना 42.2 किलोमीटर लंबा ये पुल पूर्वी तटवर्ती शहर क्विंगदाओ को जियाज़ऊ के ह्वांगदाओ के साथ जोड़ता है.

सबसे बड़ा आयोजन बीजिंग में उस स्थान पर हो रहा है जिसे ग्रेट हॉल ऑफ़ पीपल कहा जाता है. इसमें पार्टी के सभी बड़े नेता भाग ले रहे हैं.

पार्टी के 90 साल

Image caption चीन में अमीर और ग़रीब के बीच की खाई को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के आठ करोड़ सदस्य हैं. इतनी बड़ी संख्या में सदस्य होने की वजह से ये दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है.

इसकी स्थापना जुलाई, 1921 में कुछ बुद्धिजीवियों ने शंघाई में की थी. लंबे गृहयु्द्ध के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ने 1949 में नेशनलिस्ट पार्टी को पराजित कर सत्ता हासिल की थी.

माओ ज़ेडॉन्ग चीन के पहले कम्युनिस्ट नेता थे. इस पार्टी ने 1958 में आद्योगिक उत्पादन बढ़ाने का एक बड़ा निर्णय लिया. कहा जाता है कि इस दौरान बहुत से लोगों को भूखे रहना पड़ा.

माओ ने 1966 में जिहाद की तरह कम्युनिस्ट पार्टी के शुद्धिकरण के लिए सांस्कृतिक क्रांति का आह्वान किया. इस दौरान भी लाखों लोगों की मौत हुई थी.

लेकिन 1976 में माओ की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी डेंग ज़ियाओपिंग ने बाज़ार सुधार कार्यक्रम लागू किया. माना जाता है कि इसी की वजह से आज चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.

लेकिन ग़रीबों और अमीरों की बीच की खाई अभी भी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए एक चुनौती है.

बीजिंग में बीबीसी संवाददाता माइकल ब्रिस्टोव का कहना है कि अभी भी करोड़ों लोग ग़रीबी से जूझ रहे हैं जबकि कई लोगों के पास इतना पैसा आ गया है जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी.

राजनीतिक प्रक्रिया पर सवाल

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Image caption चीन में मानवाधिकार हनन की कई शिकायतें हैं

चीन के सामने एक बड़ा सवाल लोकतंत्र का भी है.

गुरुवार को चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ ने कहा, "इतिहास ने साबित कर दिया है कि सिर्फ़ कम्युनिस्ट पार्टी ही चीन को बचा सकता है."

लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि चीन पर कम्युनिस्ट पार्टी का ही शासन रहेगा क्योंकि वह किसी और को राजनीति में आने की अनुमति ही नहीं देती.

उनका कहना है कि बहुत से लोग जो चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थन करते हैं वो भी मानते हैं कि इतनी बड़ी आबादी वाले इतने बड़े देश के लिए शासन चलाने का तरीक़ा बदलना चाहिए.

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