कंधार में धमाका, चार की मौत

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Image caption अहमद वली करज़ई को दी जा रही श्रद्धांजलि के दौरान मस्जिद में आत्मधाती हमला

दक्षिणी अफ़गानिस्तान की एक मस्जिद में राष्ट्रपति हामिद करज़ई के सौतेले भाई अहमद वली करज़ई की श्रद्धांजलि सभा में हुए धमाके में चार लोग मारे गए हैं जबकि कई लोग ज़ख़्मी हुए हैं.

चश्मदीदों के मुताबिक़ एक आत्मघाती हमलावर ने कंधार मस्जिद में घुसने की कोशिश की और जब वहां तैनात सुरक्षाकर्मी ने उसे रोका, तो उसने अपनी पगड़ी में छिपे विस्फोटक में धमाका कर दिया.

इस धमाके में कंधार सूबे की इस्लामिक धार्मिक परिषद के प्रमुख हेकमतुल्लाह हेकमत भी मारे गए हैं.

धमाके के वक़्त राष्ट्रपति करज़ई के चार भाई और कंधार के गवर्नर मस्जिद में मौजूद थे.

राष्ट्रपति करज़ई के सौतेले भाई अहमद वली करज़ई की मंगलवार को उनके अंगरक्षक ने ही हत्या कर दी थी.

अहमद वली करज़ई एक विवादास्पद शख़्सियत थे लेकिन तालिबान के ख़िलाफ़ नेटो के अभियान में उनकी अहम भूमिका थी.

राष्ट्रपति करज़ई अपने भाई के जनाज़े में शामिल होने के लिए बुधवार को कंधार पहुंचे थे लेकिन गुरुवार की प्रार्थना सभा में वो मौजूद नहीं थे.

अभी तक किसी भी चरमपंथी गुट ने मस्जिद पर हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

अफ़रातफ़री मच गई

कंधार की मस्जिद में धमाका ठीक दोपहर बाद हुआ.

कंधार प्रांतीय परिषद के एक सदस्य ने बताया, ''ये एक आत्मघाती बम धमाका था जो मस्जिद के अंदर हुआ. जिस समय धमका हुआ, प्रार्थना ख़त्म ही होनेवाली थी.''

बीबीसी के कंधार संवाददाता बिलाल सरवरी ने बताया है कि धमाके के वक़्त मस्जिद के भीतर रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

धमाके के बाद इलाक़े में दहशत फैल गई.

तालिबान से अपील

अहमद वली करज़ई को उनके पारिवारिक मित्र और लंबे समय तक उनकी सुरक्षा के प्रमुख रहे सरदार मोहम्मद ने मंगलवार को गोली मार दी थी.

वली करज़ई पर दो बार गोली चलाने के बाद उनके अंगरक्षक सरदार मोहम्मद भी मारे गए थे.

तालिबान ने वली करज़ई की हत्या के बाद कहा कि ये हमला पिछले 10 साल में उनकी सबसे बड़ी क़ामयाबी है.

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Image caption राष्ट्रपति करज़ई के सौतेले भाई अहमद वली करज़ई की मंगलवार को हत्या कर दी गई थी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अहमद वली करज़ई की पहचान तालिबान विरोधी नेता के रूप में थी जिन्होंने अपनी निजी सेना और मज़बूत नेटवर्क का इस्तेमाल चरमपंथियों से मुक़ाबले के लिए किया था.

हालांकि उनके आलोचक उन पर केंद्र सरकार की अनदेखी करने के भी आरोप लगाते रहे थे.

बुधवार को वली करज़ई के जनाज़े के वक़्त राष्ट्रपति हामिद करज़ई फूट-फूट कर रो पड़े थे और उन्होंने अपने दिवंगत भाई का माथा चूम लिया था.

उसके बाद राष्ट्रपति ने चरमपंथियों से ख़ूनख़राबा बंद करने की अपील की थी.

उन्होंने कहा कि तालिबान के लिए उनका यही संदेश है कि मेरे देशवासी, मेरे भाई अपने ही लोगों को मारना बंद करो. किसी की हत्या करना आसान है और ये कोई भी कर सकता है. लेकिन असली इंसान वो है जो लोगों की ज़िंदगियाँ बचा सकता है.

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