मेलमिलाप वाली यिंगलक

यिंगलक चिनावाट इमेज कॉपीरइट Getty Images

पहले एक सफल उद्योगपति और अब एक राजनीतिक करियर, यिंगलक चिनावट अपने भाई और थाईलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री टकसिन चिनावाट के पद चिन्हों पर चल रही हैं.

फ़ू थाई पार्टी की ओर से शीर्ष उम्मीदवार रहीं यिंगलक चिनावाट देश की पहली महिला प्रधानमंत्री का पद संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. तीन जुलाई को हुए चुनाव में उनकी पार्टी को बहुमत हासिल हुआ है.

तैंतालिस वर्षीय यिंगलक ने कभी कोई पद नहीं संभाला है और न ही सरकार का हिस्सा रही हैं. उनके आलोचक राजनीति में उनके कम अनुभव की ओर इशारा करते हैं.

यिंगलक की प्रारंभिक राजनीतिक योग्यता यही रही है कि वे पूर्व प्रधानमंत्री टकसिन चिनावाट की बहन हैं, जिनकी सत्ता वर्ष 2006 में उखाड़ फेंकी गई थी.

ख़ुद ही देश से दूर रहने का फ़ैसला करने वाले और इस समय दुबई में रह रहे टकसिन चिनावाट अप्रत्यक्ष रूप से अपनी फ़ू थाई पार्टी चला रहे हैं.

पार्टी में यिंगलक ने टकसिन समर्थकों को मज़बूत किया है, जो अपने नेता को वापस अपने देश में देखना चाहते हैं, तो उन मतदाताओं को भी रिझाने की कोशिश की, जिन्होंने कुछ नहीं तय किया था.

मज़बूती

ऐसे लोगों के सामने यिंगलक ने अपने को पुरानी पार्टी के नए चेहरे के रूप में पेश किया. यिंगलक ने थाईलैंड में पिछले कई वर्षों से चल रहे हिंसक प्रदर्शनों के बीच लोकतांत्रिक चुनाव का रास्ता चुना और अपना आधार मज़बूत किया.

अपनी बहन की जीत के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि देश से दूर रह रहे पूर्व प्रधानमंत्री टकसिन चिनावाट अब भविष्य में अपनी कुछ भूमिका तलाश करेंगे. हालाँकि उन्हें हितों के टकराव का दोषी ठहराते हुए दो साल की कारावास की सज़ा सुनाई गई है.

चिनावाट का परिवार राजनीतिक रूप से काफ़ी मज़बूत रहा है. यिंगलक इस परिवार की नौवीं संतान हैं, जिन्होंने राजनीति में क़दम रखा है.

उन्होंने थाईलैंड के उत्तरी शहर चियांग मई से अंडरग्रेजुएट और अमरीका के केंचुकी स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर्स किया है. चियांग मई यिंगलक के परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता है.

अभी तक उन्होंने उद्योग जगत में ही अपने हाथ आज़माए थे. पहले वे एक दूरसंचार कंपनी एआईएस में प्रबंध निदेशक के रूप में काम कर चुकी हैं. ये कंपनी उनके भाई टकसिन चिनावाट ने स्थापित की थी.

इसके अलावा यिंगलक ने एससी ऐसेट कंपनी के प्रबंध निदेशक के रूप में भी काम किया है. ये कंपनी उनके परिवार की थी, जो प्रॉपर्टी के क्षेत्र में काम करती थी.

मेलमिलाप

यिंगलक की मानें तो देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने की दिशा में उन्होंने राष्ट्रीय मेलमिलाप को बढ़ावा देने के लिए एक महिला के रूप अपनी विशेषता का इस्तेमाल करने की योजना बनाई और लोगों से यह कहा कि अपने को साबित करने के लिए उन्हें वे मौक़ा दें.

बैंकॉक में पार्टी की एक बैठक में उन्होंने कहा था, "मैं नियम-क़ानून के मुताबिक़ संघर्ष करने को तैयार हूँ. मैं अपने को साबित करने के लिए मौक़ा दिए जाने को कहूँगी. मैं आपसे वैसे भरोसे की मांग कर रही हूँ, जैसे आप मेरे भाई के साथ दिखाते थे. मैं महिला के रूप में अपनी विशेषता का इस्तेमाल अपने देश के लिए काम करने में करूँगी."

महिला के रूप में यिंगलक के आकर्षण ने चुनावी अभियान में तेज़ी ला दी.

जब भी वे मुस्कुरा कर और घुटनों से झुककर किसी झुर्रीदार बुजुर्ग महिला या दीन-हीन किसान का सम्मान करती थीं, लोग उनके स्नेह से अभिभूत हो जाते थे.

कई चुनावी रैलियों में वे अपने बेटे पिपे के साथ मंच पर आती थी. पर्दे के पीछे उनके समालोचक ये कहने में पीड़ा महसूस करते थे कि वे कई बुर्जुग राजनेताओं से सलाह लिया करती थी, इनमें से कई थाई राजनीति के पारंपरिक सत्ता के केंद्र माने जाते थे.

इन सबके बीच उन्होंने ऐसी प्रचार रणनीति बनाई, जिसमें उन्होंने अपने उम्मीदवार के आकर्षण को प्रदर्शित किया गया.

ख़ासियत

बैंकॉक के एक विश्लेषक की वेबसाइट पर कहा गया- वे अपने संदेशों पर टिके रहने को लेकर बहुत सावधान रहती हैं. हालाँकि उनके पास सभी सवालों के सही जवाब नहीं, लेकिन वे इतनी चालाक हैं कि वे किसी समझौते वाले जवाब में नहीं फँसती.

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption टकसिन इस समय दुबई में रह रहे हैं

यिंगलक की एक और ख़ासियत ये रही कि उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान अपने प्रतिद्वंद्वियों के लिए सिर्फ़ अच्छी बातें कहीं. इस रणनीति के कारण उनके पुरुष प्रतिद्वंद्वी पीछे छूट गए.

एक विश्लेषक कहते हैं- उन्हें बुरे रूप में दर्शाना काफ़ी मुश्किल है, जबकि वो चेहरा उन बहुसंख्यक लोगों के लिए उतना बुरा नहीं हो सकता, जिन्होंने कुछ फ़ैसला नहीं किया था और जो लोग मेलमिलाप के उनके सुर को पसंद कर सकते हैं.

यिंगलक से नई नीति वाले प्लेटफ़ॉर्म या फिर कुछ मूलभूत विचारों की उम्मीद ज़रूरी नहीं कि पूरी हो. यिंगलक उस राजनीतिक मशीन की पैदाइश हैं, जो कारगर है और जिसने वर्ष 2001 से किसी न किसी रूप में भारी चुनावी जीत दिलाई है.

संबंधित समाचार