'ग़ुलाम नबी आज़ाद इस्तीफ़ा दें'

समलैंगिक परेड

स्वास्थ्य मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद की समलैंगिकों पर की गई टिप्पणी पर समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी नाराज़गी जताई है.

सोमवार को एचआईवी-एड्स पर हुए एक सम्मेलन में ग़ुलाम नबी आज़ाद ने समलैंगिकता को एक 'रोग' क़रार दिया था और इस चलन को 'अप्राकृतिक' बताया था. हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि उनके बयान का ग़लत अर्थ निकाला गया था.

भारत में समलैंगिक अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने इस टिप्पणी की आलोचना की है और कहा है कि स्वास्थ्य मंत्री की ओर से ऐसे विचार सामने आना दुर्भाग्यपूर्ण है.

समलैंगिकों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था नाज़ फ़ाउंडेशन की प्रबंध निदेशक अंजली गोपालन ने कहा, “हमारे देश के स्वास्थ्य मंत्री को ऐसी भद्दी बातें करते हुए देख कर लगता है कि उन्हें समलैंगिकता से जुड़े मुद्दों की कतई समझ नहीं है. ग़ुलाम नबी आज़ाद की बातें सुन कर लगता है कि वे देश के हित के बारे में न सोच कर सिर्फ़ ‘प्राकृतिक रुझान रखने वालों’ के बारे में सोच रहे हैं.”

दूसरी ओर समलैंगिकों के अधिकार और हितों के लिए काम करने वाले जाने-माने कार्यकर्ता अशोक राव कवि ने दबे शब्दों में ग़ुलाम नबी आज़ाद की आलोचना करते हुए कहा, “मैं मानता हूं कि ग़ुलाम नबी आज़ाद की ज़बान फिसली है, लेकिन मैं ये भी जानता हूं कि उस सम्मेलन वे उन राजनीतिज्ञों को संबोधित कर रहे थे जिनकी मानसिकता बेहद पिछड़ी हुई है. चूंकि मुझे समलैंगिक समुदाय के हित के लिए सरकार के साथ मिल कर काम करना है, इसलिए मैं सरकार की आलोचना करते हुए अपनी सीमा नहीं पार कर सकता.”

आपको याद होगा कि साल 2009 में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्तवपूर्ण फ़ैसले में कहा था कि दो मर्द या औरत अगर अपनी सहमति से बंद कमरे के भीतर यौन संबंध बनाते हैं तो ये अपराध नहीं है.

हाई कोर्ट की इस घोषणा से पहले भारत में पुरुषों और स्त्रियों के बीच समलैंगिक संबंध गैर क़ानूनी और अनैतिक माने जाते थे.

भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत ऐसे संबंध बनाए जाने पर कड़ी सजा का भी प्रावधान था. लेकिन हाई कोर्ट के फ़ैसले ने 2009 में इस क़ानून को बदलने का आदेश दिया था.

‘होमवर्क करें मंत्री’

Image caption ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि समलैंगिकता एक रोग है.

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने एचआईवी एड्स के मुद्दे पर ज़िला परिषद अध्यक्षों और मेयरों के एक सम्मेलन में ये आपत्तिजनक बातें कहीं.

ग़ौरतलब है कि एड्स एचआईवी पर यह सम्मेलन सांसदों ने आयोजित किया था जिसमें सोनिया गांधी और कई केंद्रीय मंत्री शामिल हुए थे.

इस सम्मेलन में ग़ुलाम नबी आज़ाद ने ये भी कहा कि महिला यौनकर्मी पुरुषों में एचआईवी संक्रमण फैलाने की ज़िम्मेदार होती हैं.

केंद्रीय मंत्री का कहना था, ‘‘एचआईवी एड्स के मामले में समलैंगिक संबंध एक चुनौती है. महिला यौनकर्मियों के मामले में हम उनका पता लगा सकते हैं और उनकी मदद कर सकते हैं लेकिन पुरुषों का पुरुषों के साथ सेक्स के मामले में यह कठिन हो रहा है.’’

उनकी इस टिप्पणी को सिरे से नकारते हुए अंजली गोपालन ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को अपना ‘होमवर्क’ ठीक से करने की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, “मैं स्वास्थ्य मंत्री को बताना चाहूंगी कि औरत से पुरुष को संक्रमण होने का ख़तरा बहुत कम होता है. एचआईवी संक्रमण ज़्यादातर पुरुषों से ही औरतों को लगता है. हमने बहुत सी महिला यौनकर्मियों के साथ काम किया है और मैं बता सकती हूं कि वे कण्डोम का इस्तेमाल करने के लिए पुरुषों को प्रोत्साहित करती हैं. एचआईवी के ज़्यादातर मामले उन पुरुषों की पत्नियों में देखने को मिलते हैं, जो कण्डोम का इस्तेमाल नहीं करते. यौनकर्मियों को दोषी ठहराना बिलकुल ग़लत है.”

भारत में एचआईवी एड्स से प्रभावित लोगों की संख्या 25 लाख से अधिक है और इसमें समलैंगिक भी हैं.

‘मंत्री इस्तीफ़ा दें’

ग़ुलाम नबी आज़ाद की टिप्पणी के बारे में जब मैंने एक समलैंगिक युवक से बात की तो उन्होंने इसकी भर्त्सना करते हुए मंत्री के इस्तीफ़े की मांग की.

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले ग़ौरव ने कहा, “समलैंगिकता कोई रोग नहीं है और ऐसा मैं ही नहीं बल्कि साइंस भी कहती है. अगर हमारे स्वास्थ्य मंत्री ऐसी टिप्पणी करते हैं, तो उन्हें अपने पद से तुरंत इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. जहां तक सुरक्षित यौन संबंध की बात है, तो मैं कभी भी असुरक्षित यौन संबंध नहीं बनाता. केवल समलैंगिकों को ही सीख देना बंद करें. मेरा मानना है कि सिर्फ़ समलैंगिकों को ही नहीं, बल्कि सभी को सुरक्षित यौन संबंध बनाने चाहिए.”

एड्स और एचआईवी पर काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र विभाग यूएनएड्स ने भी एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर समलैंगिकता से जुड़ी ग़लत धारणाओं को ख़ारिज किया है.

ये पहली बार नहीं है जब ग़ुलाम नबी आज़ाद अपनी आपत्तिजनक टिप्पणियों की वजह से घेरे में आ गए है.

साल 2009 में उन्होंने कहा था कि लोगों को शारीरिक संबंध बनाने से रोकने के लिए हर घर में एक टेलीविज़न होना चाहिए, ताकि वे यौन संबंध पर ध्यान न देकर टेलीविज़न पर ज़्यादा ध्यान दें.

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