अमरीका को चीन की चेतावनी

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Image caption दलाई लामा की अमरीका यात्रा पर चीन नाराज़

चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर अमरीकी अधिकारियों को निर्वासित तिब्बती धर्म गुरू दलाई लामा से नहीं मिलने की चेतावनी दी है.

उन्होंने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि वाशिंगटन तिब्बत संबंधी मामलों को ‘उचित’ तरीके से निपटाएगा.

दलाई लामा फ़िलहाल अमरीका के दौरे पर हैं और शनिवार को वे वाशिंगटन में एक सार्वजनिक भाषण भी देंगे.

चीन की इस चेतावनी को दरकिनार करते हुए गुरूवार को रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के नेताओं ने दलाई लामा के प्रति अपना समर्थन ज़ाहिर किया.

ओबामा से मुलाक़ात

हालांकि व्हाइट हाउस ने अभी तक दलाई लामा और राष्ट्रपति बराक ओबामा की किसी भी संभावित मुलाक़ात की घोषणा नहीं की है.

फ़रवरी 2010 में दलाई लामा ने अपनी अमरीका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति से भेंट की थी जिसकी चीन ने कड़ी आलोचना की थी.

चीन के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता हौंग ली ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दलाई लामा की विदेश यात्रा पर चीन का रवैया बेहद साफ़ है.

‘हम दलाई लामा की ढंपी-छिपी विदेश यात्रा का विरोध करते हैं. ऐसी यात्रा का इस्तेमाल वे देश को बांटने की गतिविधियों में कर रहे हैं. साथ ही हम किसी भी विदेशी सरकार या नेता का दलाई लामा की इन गतिविधियों में किसी भी तरह की भागेदारी का विरोध करते हैं.'

उन्होंने आगे कहा चीन ये उम्मीद करता है कि अमरीका ईमानदारी से तिब्बत मामले में किए अपने वायदे को निभाएगा और सतर्कता पूर्ण रवैया अपनाएगा.

शिकायत

अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने चीन की इस शिकायत की बात स्वीकार की है.

अमरीका की दोनों पार्टियों के सांसदों ने व्हाइट हाउस में दलाई लामा को आमंत्रित करने की मांग की है.

चीन धर्म गुरू दलाई लामा को एक पृथकतावादी आंदोलनकारी मानता है और उन्हें किसी भी तरह की आधिकारिक मान्यता नहीं देता है.

दलाई लामा ने 1959 में चीन से भाग कर भारत में शरण ली थी

अमरीका की उनकी ये यात्रा अब तक की सबसे लंबी यात्रा है.

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