इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पाएगें कि साल 1982 में नौ जुलाई ही के दिन ब्रिटेन की महारनी एलिज़ाबेथ के बेडरूम में एक आदमी घुस आया था. साल 1973 में बहामास ब्रिटिश ग़ुलामी से आज़ाद हुआ. इसी दिन हिंदी फ़िल्म जगत के महान सितारे गुरु दत्त का जन्मदिन हुआ था.

1982 :महारानी एलिज़ाबेथ ने अपने बेडरूम से घुसपैठिये को भगाया

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Image caption घुसपैठिये को अपने कमरे में देख कर रानी ने बिना घबराए उससे करीब दस मिनट तक बात की

साल 1982 में ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के बकिंघम पैलेस के उनके निजी शयनकक्ष में एक आदमी तमाम बाधाओं और सुरक्षा चक्रों को पार करते हुए घुस आया था.

सुबह के क़रीब सात बजे 31 साल के माइकल फागन ने महल के चारों तरफ़ बनी दीवार फांदी और एक पाइप के सहारे महारानी के निजी बेडरूम में जा धमके.

नंगे पावँ और टीशर्ट पहने फागन को न कोई यांत्रिक अलार्म पकड़ पाया न ही महल के और पुलिस के सिपाही जो चारों तरफ तैनात थे. महारानी को उसकी उपस्थिति का पता तब लगा जब उसने कमरे का पर्दा हटाया. महारानी तभी अपने अंगरक्षकों को बुला सकीं जब उसने महारनी से एक सिगरेट की मांग की.

जांच पर पता लगा कि उस समय सुरक्षा चक्र के सिपाही बदलने का समय था और शाही कमरे के बाहर तैनात अधिकारी कुत्तों को घुमाने के लिए गया हुआ था.

फागन पर बाद में बकिंघम से आधी बोतल शराब चुराने और अनाधिकृत रूप से घुस आने के आरोप में मुक़दमे दर्ज किए गए. सितंबर महीने में उसके ऊपर से ये आरोप भी हटा लिए गए. जब फागन ने एक कार चोरी करने के बारे में पुलिस को बताई तो जज ने बजाए जेल भेजने के, उसे मानसिक चिकित्सालय भेज दिया.

1973: बहामास में ब्रितानी साम्राज्य का सूरज अस्त

Image caption बहामास के श्वेत लोग ब्रिटेन से देश की आज़ादी के खिलाफ़ थे.

ब्रितानी महारानी के प्रतिनिधि के रूप में राजकुमार चार्ल्स ने 300 साल पुराने उपनिवेश बहामास में आख़िरी रात बिताई.

सात सौ द्वीपों की श्रृंखला वाले इस राष्ट्र की राजधानी नासाओ में रात बारह बजे के चंद मिनटों पहले ब्रितानी साम्राज्य का प्रतीक यूनियन जैक उतार लिया गया. उसकी जगह नासाओ का नीला काला सुनहरा झंडा परवान चढ़ा.

ब्रिटेन में बहामास को स्वतंत्रता देने के लिए आम सहमती थी. बहामास में ज्यादातर लोग स्वतंत्रता की ख़ुशियाँ मना रहे थे लेकिन स्थानीय गोरे लोगों ने इन समारोहों का बहिष्कार किया था. देश की गोरी आबादी ये चाहती थी कि देश पर अंग्रेज़ी राज क़ायम रहे.

1925: हिंदी फिल्मों के कलाकार गुरु दत्त का जन्म

Image caption गुरु दत्त और उनकी पत्नी गीता दत्त बीबीसी प्रसारक आले हसन के साथ

आज ही के दिन साल 1925 में वसंतकुमार शिवशंकर पाडूकोण का जन्म हुआ था. पादुकोण जो आगे चल कर हिंदी फ़िल्मों में गुरु दत्त के नाम से जाने गए उन्हें हिंदी फ़िल्म जगत के सबसे कमाल के कलाकारों में से एक माना जाता है.

प्यासा, क़ागज़ के फूल, चौदहवीं का चाँद तथा साहब बीबी और ग़ुलाम जैसी उनकी फ़िल्मों को आज तक की बेहतरीन हिंदी फ़िल्मों की सूची में रखा जाता है.

टाइम पत्रिका ने प्यासा और कागज़ के फूल को आज तक की दुनिया की सौ सबसे अच्छी फ़िल्मों में जगह दी थी. गुरु दत्त ने एक अभिनेता, निर्देशक और निर्माता तीनों ही रुपों में एक से एक हिट फ़िल्में दीं. साल 1964 में 10 अक्टूबर के दिन उनकी मृत्यु हो गई.

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