'शहज़ाद की हत्या में पाक सरकार का हाथ'

माइक मलन
Image caption माइक मलन पहले अमरीकी अधिकारी हैं जिन्होंने पाकिस्तान की सरकार पर ये आरोप लगाया है.

अमरीकी सेना के उच्च अधिकारी माइक मलन ने कहा है कि पाकिस्तानी पत्रकार सलीम शहज़ाद के हत्यारों को पाकिस्तान सरकार की स्वीकृति प्राप्त थी.

माइक मलन ने ये भी कहा कि पत्रकारों को प्रताड़ित कर पाकिस्तान की सरकार आगे नहीं बढ़ सकती.

पाकिस्तानी हुकुमत ने माइक मलन के बयान को ग़ैर ज़िम्मेदाराना क़रार दिया है.

ग़ौरतलब है कि गत पाँच जून को अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमरीकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया था कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने पाकिस्तानी पत्रकार सलीम शहज़ाद की हत्या का आदेश दिया था.

अमरीकी सेना प्रमुख एडमिरल माइक मलन पहले अमरीकी अधिकारी हैं जिन्होंने आधिकारिक रूप से पाकिस्तान की सरकार पर ये आरोप लगाया है.

माइक मलन से जब शहज़ाद की हत्या में पाकिस्तान के सरकार का हाथ होने की ख़बरों पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कहा, “मैं ये कहूंगा कि मैंने ऐसा कोई सबूत नहीं देखा है जिसे देख कर इन दावों को ग़लत बताया जा सके.”

हालांकि उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि उनके पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि सलीम शहज़ाद की हत्या के पीछे आईएसआई का हाथ था.

बयान ग़ैर ज़िम्मेदाराना

पाकिस्तानी ने माइक मलन के बयान को ग़ैर ज़िम्मेदाराना बताया है.

एक सरकारी प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस प्रकार के बयान मामले की जाँच में मदद नहीं करेंगे.

प्रवक्ता ने कहा है कि सरकार ने पहले ही मामले की निष्पक्ष जाँच के लिए एक आयोग का गठन किया है और निर्देश दिए गए हैं कि जिनके पास इस मामले पर कोई भी जानकारी है वो इसे आयोग को दें.

उनके मुताबिक़ अगर कोई भी बयान इस प्रकार से दिया जाएगा तो इसको आयोग के कामकाज पर प्रभाव डालने की कोशिश समझा जाएगा.

हालांकि बयान में प्रवक्ता का नाम नहीं दिया गया है.

बचाव मुद्रा में आईएसआई

पत्रकार सलीम शहज़ाद को 29 मई को अग़वा किया गया था और दो दिनों बाद उनकी लाश मंडी बहाउद्दीन से मिली थी.

सलीम शहज़ाद की लाश पर प्रताड़ना के निशान थे और मानवाधिकार की अंतरराष्ट्रीय संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस हत्या के लिए पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों को ज़िम्मेदार ठहराया था.

हालांकि सलीम शहज़ाद की हत्या के दो दिनों बाद एक बयान जारी कर आईएसआई ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया था.

आईएसआई ने कहा था कि पत्रकार की हत्या की आड़ में पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को बदनाम किया जा रहा है.

विश्लेषकों का कहना है कि माइक मलन की इस टिप्पणी का पाकिस्तान और अमरीका के रिश्तों पर बुरा असर पड़ सकता है.

माइक मलन अक्सर पाकिस्तान के दौरे पर जाते रहते हैं और वहां के सैन्य और सरकारी अधिकारियों से मुलाक़ात करते हैं.

ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में मारे जाने के बाद अमरीका और पाकिस्तान के बीच पहले से ही ख़ासा तनाव है.

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