मंदिर का ख़ज़ाना कितना बड़ा?

श्री पद्मनाभम

केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय ख़बरों में छाया हुआ है क्योंकि यहाँ बरसों से छिपी अकूत संपदा का पता चला है. केरल में त्रावणकोर के राजा इस मंदिर के मालिक रहे.

उनका इतिहास भी काफ़ी दिलचस्प रहा है. भारत की आज़ादी से केवल एक साल पहले पाँच सौ से ज़्यादा राज्यों ने ग़दर का परचम उठाया.

ये सभी राज्य आज़ादी की मांग कर रहे थे.

लेकिन आख़िरकार त्रावणकोर रियासत ने भारत में शामिल होने का फ़ैसला कर लिया.

भारतीय संघ में शामिल होने के बावजूद उनका 16वीं शताब्दी के श्री पद्मनाभास्वामी मंदिर पर अधिकार बना रहा.

अटकलबाज़ी

कई लोग इस बात से आश्चर्यचकित नहीं हो रहे हैं कि शाही परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में मंदिर के एक श्रद्धालु की उस अर्ज़ी को चुनौती दी है कि इस मंदिर की देखभाल अब सरकार की ज़िम्मेदारी होनी चाहिए क्योंकि पूर्व शाही परिवार मंदिर के ख़ज़ाने की देखभाल करने में अक्षम हैं.

इस अर्ज़ी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के ख़ज़ाने का हिसाब करने का आदेश दिया और उसके बाद से ही अटकलबाज़ियां शुरू हो गईं.

मीडिया में कई तरह की चर्चा गर्म होने लगी. अटकलें लगने लगीं कि मंदिर के छह तहख़ानों में कितनी संपत्ति है.

यहाँ बेहद पुराने सोने की ज़ंजीरें, हीरे-जवाहरात और क़ीमती पत्थर रखे होने की अटकलें लगाई जा रही हैं.

इस संपत्ति की क़ीमत पैसे में नहीं आँकी जा सकती.

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यहाँ सोने से भरी 450 हांडियाँ, 2,000 रूबी और जड़ाऊ मुकुट, सोने की 400 कुर्सियाँ और एक मूर्ति जिसमें 1,000 हीरे जड़े हुए हैं.

इनकी क़ीमत बीस अरब डॉलर बताई जा रही है जो कि भारत का शिक्षा बजट जितना है.

पर सच्चाई ये है कि ये सब अटकलबाज़ी ही है. जो लोग इसकी क़ीमत लगाने गए थे, उन्हें अपना आकलन कोर्ट में देना है.

फिर भी ये साफ़ है कि भारत के कई धनी मंदिरों की तरह, श्री पद्मनाभास्वामी मंदिर के पास काफ़ी धन है.

इतिहास के आइने में

एक इतिहासकार के अनुसार ये धन ‘कर, तोहफ़ो,रिश्वत और जीते गए राज्यों से लूटे गए पैसों’ का हिस्सा है. 1931 में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार उस समय चीज़ो की सूची बनाने के लिए कम से कम एक तहख़ाने को खोला गया था.

खोलने की पूरी प्रक्रिया भी काफ़ी नाटकीय थी. ज़ंक खाए तालों को तोड़ने में ढाई घंटे लगे थे.

एक एम्बुलेंस को बाहर खड़ा किया गया था ताकि किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटा जा सके.

फ़्लडलाईट और टार्च से पूरी जगह रोशन थी. उस वक्त अधिकारियों ने काँसे के बने चार बक्सों का ज़िक्र किया है जिनमें पुराने सिक्के भरे हुए थे.

उन्होंने एक गोदाम जैसी जगह का ज़िक्र भी किया है जो सोने और चांदी के सिक्कों से भरा हुआ था. इसके अलावा सोने की हांडी और छ ख़ानों वाले एक लकड़ी के बक्से की बात भी कही गई है जो कि हीरे जवाहरात से भरा हुआ था.

इतिहासकार एम जी साई सी भूषण ने मंदिर के इतिहास पर एक किताब लिखी है. उनका कहना है मंदिर में इतना धन रखा जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं है.

अब बहस का मुद्दा ये है कि आख़िर मंदिर का इतना पैसा किसका है.

कुछ लोग कहते हैं कि ये सारा पैसा आम लोगों का है और इसका इस्तेमाल उनकी भलाई के लिए खर्च किया जाना चाहिए.

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