विवाद के बीच मर्डोक लंदन में

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Image caption न्यूज़ इंटरनेशनल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रेबेका ब्रुक्स के साथ रूपर्ट मर्डोक

जाने-माने अंतरराष्ट्रीय मीडिया व्यवसायी रूपर्ट मर्डोक अपने समाचारपत्र 'न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' को लेकर शुरू हुए विवाद से निबटने के लिए आज लंदन पहुँच रहे हैं.

टेलीफ़ोन हैकिंग और पुलिसकर्मियों को रिश्वत देने का मामला इतना बढ़ा कि रूपर्ट मर्डोक को अपना टेबोलॉयड अख़बार न्यूज़ ऑफ़ वर्ल्ड बंद करने की घोषणा करनी पड़ी.

इस मामले में प्रधानमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार को गिरफ़्तारी के बाद शुक्रवार की रात को ज़मानत पर रिहा किया गया है.

प्रधानमंत्री को न्यायिक जाँच का आदेश देना पड़ा है, अब रूपर्ट मर्डोक की सैटेलाइट टीवी कंपनी बीस्काईबी का अधिग्रहण करने की योजना भी ख़तरे में पड़ती दिख रही है.

फ़ोन हैकिंग के मामले की जाँच कर रही पुलिस ने एक 63 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है, पिछले 24 घंटों में यह तीसरी गिरफ़्तारी है.

शुक्रवार को प्रधानमंत्री कैमरन ने मामले की विस्तृत न्यायिक जाँच की घोषणा की, उन्होंने माना कि इस मामले में ग़लतियाँ हुई हैं, उन्होंने माना कि प्रेस की हिमायत हासिल करने के लिए नेताओं ने उनकी ग़लत हरकतों को नज़रअंदाज़ किया.

इस मामले में प्रधानमंत्री ख़ुद कड़े सवालों की मार झेल रहे हैं, उनके मीडिया सलाहकार एंडी कॉलसन बुरी तरह बदनाम हो चुके न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड के संपादक थे, इस मामले के तूल पकड़ने पर उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

जज करेंगे जाँच

जाँच की घोषणा करते हुए डेविड कैमरन ने कहा, "जो कुछ भी हुआ उसकी जाँच होगी, गवाहों को एक जज के साथ शपथ लेकर अपना बयान देना होगा, कोई कसर बाक़ी नहीं रखी जाएगी. इस मामले से हमें व्यापक स्तर पर कई सबक़ सीखने की ज़रूरत है जो इस देश में प्रेस के भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ है."

विपक्षी लेबर पार्टी ने माँग की है कि जल्द से जल्द मामले की जाँच करने के वाले जज के नाम की घोषणा की जाए, ऐसी अफ़वाहें गर्म हैं कि न्यूज़ इंटरनेशनल में लाखों की संख्या में ईमेल डिलीट किए जा रहे हैं और कागज़ों को मशीनों से काटा जा रहा है.

न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड, सन और टाइम्स जैसे अख़बारों का प्रकाशन करने वाली कंपनी न्यूज़ इंटरनेशनल ने इन आरोपों को ग़लत बताया है.

विपक्ष के नेता एड मिलिबैंड ने कहा, "न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड में जो कुछ हुआ उसके शिकार बेकसूर लोग हुए हैं, उससे ब्रिटिश पत्रकारिता की साख गिरी है. मैं जेम्स मर्डोक की इस स्वीकारोक्ति का स्वागत करता हूँ कि इस मामले में गंभीर ग़लतियाँ हुई हैं लेकिन न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड को बंद करना समस्या का समाधान नहीं है, यह गड़बड़ी जिन लोगों के नेतृत्व में हुई है उन्हें अपनी ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए."

जानकारों का कहना है कि यह मामला यहीं नहीं थमने वाला है और इस विवाद में कई दूसरे प्रकाशन समूह भी फँस सकते हैं.

पेचीदा विवाद

ब्रिटेन के क़ानून के मुताबिक़ किसी अन्य व्यक्ति के फ़ोन की टैपिंग अपराध है जबकि शुरूआती जानकारी से पता चलता है कि कई अख़बारों के पत्रकार निजी जासूसी कंपनियों की मदद से देश भर में हज़ारों लोगों के मोबाइल संदेश सुन रहे थे, जिनमें कई नेता, अभिनेता और फुटबॉल खिलाड़ी शामिल थे, और तो और एक किशोरी जिसकी हत्या कर दी गई थी उसके मोबाइल पर आए संदेशों को भी सुना जा रहा था.

इस विवाद के केंद्र में मौजूद रविवारीय टेबोलायड अख़बार न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड की पूर्व संपादक और अब न्यूज़ इंटरनेशनल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रेबेका ब्रुक्स का कहना है कि टेलीफ़ोन हैकिंग से जुड़े मामले में अभी और सनसनीखेज़ जानकारियाँ सामने आ सकती हैं.

इस पूरे विवाद ने मीडिया और सरकार के आपसी रिश्तों को ही बहस के दायरे में ला दिया है और माना जा रहा है कि रूपर्ट मर्डोक के मीडिया तंत्र का बहुत शक्तिशाली होना इसकी वजह है क्योंकि नेता उनसे उलझना नहीं चाहते जबकि उनके अख़बार लोकप्रियता हासिल करने के लिए नियमों का उल्लंघन करते हैं.

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