पाकिस्तान को 'सैनिक सहायता' पर रोक

पाकिस्तानी सेना

अमरीका ने कहा है कि वो पाकिस्तान को 80 करोड़ डॉलर की सैनिक सहायता रोक रहा है. ये अमरीका की ओर से पाकिस्तान को मिलने वाली सालाना सैनिक सहायता का एक तिहाई है.

व्हाइट हाउस के चीफ़ ऑफ़ स्टॉफ़ बिल डेली ने एबीसी के दिस वीक कार्यक्रम में बताया कि पाकिस्तान ने कुछ ऐसे क़दम उठाए हैं, जिससे अमरीका को कुछ सहायता राशि पर रोक लगाने की वजह मिली है.

उन्होंने कहा कि इस साल मई में अमरीकी सेना ने पाकिस्तान में कार्रवाई करके अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार दिया था, इससे पाकिस्तान के लोगों में 'काफ़ी पीड़ा' थी.

बिल डेली ने कहा कि पाकिस्तान के साथ अमरीका के रिश्ते पर काफ़ी काम करने की आवश्यकता है.

उन्होंने ये स्वीकार किया कि पाकिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध में अमरीका का प्रमुख सहयोगी रहा है और पाकिस्तान ख़ुद भी आतंकवाद से पीड़ित रहा है.

'जटिल रिश्ता'

बिल डेली ने कहा, "दुनिया के काफ़ी जटिल और मुश्किल हिस्से में यह काफ़ी जटिल रिश्ता है. जब तक कि हम इस मुश्किल से नहीं निकल जाते, हम सहायता राशि के कुछ हिस्सों को रोकना चाहते हैं, जिसे अमरीका की टैक्स देने वाली जनता ने पाकिस्तान को देने की प्रतिबद्धता जताई थी."

इससे पहले एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी के हवाले से न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा था कि जितनी राशि रोकी जा रही है, वो अमरीका की ओर से पाकिस्तान को सालाना मिलने वाली सैनिक सहायता राशि का एक तिहाई है.

जानकारों का कहना है कि ये अमरीका और पाकिस्तान के मुश्किल होते रिश्ते की निशानी है. पिछले सप्ताह एक शीर्ष अमरीकी सैनिक अधिकारी माइक मलेन ने कहा था कि पाकिस्तान की सरकार ने पत्रकार सलीम शहज़ाद की हत्या को 'मंज़ूरी' दी थी.

इस पर पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी. पाकिस्तान की सूचना मंत्री डॉक्टर फ़िरदौस आशिक़ अवान ने कहा था कि ये बयान ग़ैर ज़िम्मेदाराना और खेदपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि इस बयान से दोनों देशों के रिश्तों में मुश्किलें आएँगी और आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध को भी झटका लगेगा.

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