खाद्य और सुरक्षा विधेयक तैयार

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Image caption भारत में खाद्य और सुरक्षा विधेयक का मसौदा तैयार

भारतीय मंत्रियों के एक सशक्त दल या ईजीओएम ने खाद्य और सुरक्षा विधेयक के प्रारूप को मंज़ूरी दे दी है जिससे बहुत कम दाम में गेहूं और चावल पाना निर्धन लोगों का क़ानूनी अधिकार बन जाएगा.

इस दल की अध्यक्षता वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी कर रहे थे.

मंत्रियों के दल ने उस प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी जिससे भारत की 75 प्रतिशत ग्रामीण जनता और 50 प्रतिशत शहरी जनता को सस्ता अनाज उपलब्ध होगा.

इस विधेयक के पारित हो जाने से भारत की 68 प्रतिशत आबादी की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी.

इस कार्यक्रम को लागू करने में राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी इसलिए उन्हे साथ लेकर चला जाएगा.

ये विधेयक पहले क़ानून मंत्रालय के पास जाएगा और फिर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के पास उसके बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा.

इस विधेयक को संसद के मॉनसून सत्र में रखने का इरादा है.

इसके पारित होने के बाद ग़रीबी की रेखा से नीचे जी रहे प्रति व्यक्ति को हर महीने 7 किलो अनाज मिलेगा. इसमें चावल के दाम होंगे तीन रुपए प्रति किलो और गेहूं के दो रुपए प्रति किलो.

ग़रीबी की रेखा से ऊपर रहने वालों को प्रति व्यक्ति तीन से चार किलो अनाज मिलेगा और इसके दाम उससे आधे होंगे जो सरकार किसान को देती है.

खाद्य सुरक्षा विधेयक को लागू करने के लिए 51,000000 टन अनाज की ज़रूरत पड़ेगी और सरकार को 13,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी देनी पड़ेगी.

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