सचान हत्याकांड: सीबीआई जाँच के आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच
Image caption राज्य सरकार ने जाँच सीबीआई को सौंपने की घोषणा कर दी थी इसके बाद भी हाईकोर्ट ने आदेश दिए

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आज औपचारिक रूप से सीबीआई को निर्देश जारी कर दिए कि वह पिछले दिनों लखनऊ जेल में बहुचर्चित डा. सचान हत्याकांड की जांच अपने हाथ में ले ले.

डा. योगेन्द्र सिंह सचान लखनऊ में परिवार कल्याण विभाग में डिप्टी सीएमओ थे.

सरकार उनकी मौत को आत्महत्या बता रही थी, लेकिन न्यायिक जांच में साबित हो गया कि यह सुनियोजित हत्या थी.

तार

माना जाता है कि डाक्टर सचान की हत्या के तार विभाग में बड़े पैमाने पर वित्तीय घोटालों और दो मुख्य चिकित्सा अधिकारियों डा. बी पी सिंह और डा. विनोद आर्य की हत्या से जुड़े थे.

इसीलिए मायावती सरकार पहले सीबीआई जांच का विरोध कर रही थी.

इसी विरोध के चलते हाईकोर्ट ने मंगलवार को अपना फ़ैसला सुरक्षित कर लिया था.

गुरुवार को अदालत के बैठने पर सरकारी वकील ने बताया कि सीबीआई जांच की सिफारिश केन्द्र सरकार को भेज दी गई है. लेकिन याचिकाकर्ता के वकील इससे संतुष्ट नही थे.

उनका कहना था कि इससे पहले राज्य सरकार ने कई मामलों में सीबीआई जांच के लिए लिखा, लेकिन सीबीआई ने मामला अपने हाथ में लेने से मना कर दिया.

सीबीआई जांच

इससे पहले तमाम हीलाहवाली और फ़ज़ीहत के बाद मायावती सरकार ने बुधवार को डाक्टर सचान की हत्या के मामले की सीबीआई जांच की सिफ़ारिश केन्द्र सरकार को भेज दी थी.

सरकार की एक विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश के बाद इस मामले सीबीआई से जांच कराने का निर्णय किया गया.

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सीबीआई जांच का पुरज़ोर विरोध करते हुए अपने अधीन स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम से जांच कराने का सुझाव दिया था.

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा था, "राज्य सरकार का मानना है कि सीबीआई केन्द्र सरकार के अधीन कार्य करती है, ऐसी स्थिति में उसे स्वतंत्र एजेंसी नहीं कहा जा सकता."

लेकिन याचिकाकर्ता के वकील ने सरकार के तर्क को काटते हुए सीबीआई जांच पर ही जोर दिया था.

किरकिरी

अदालत ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान उत्तर पुलिस प्रदेश पुलिस द्वारा इस मामले की जांच रोकने के साथ ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि यह मामला सीबीआई को सौंप दिया जाएगा.

इससे पहले न्यायिक जांच में माया सरकार का यह दावा झूठा साबित हो चुका है कि डा. सचान ने जेल अस्पताल के शौचालय में गले में बेल्ट से फंदा लगाकर आत्महत्या की थी.

समझा जाता है कि राज्य सरकार को इस बात का अंदाज़ हो गया था कि हाईकोर्ट सीबीआई जांच का आदेश कर देगी तो उसकी और किरकिरी होगी.

यही सब देखते हुए मुख्यमंत्री मायावती ने आज अपने घर पर गृह एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाकर सीबीआई से जांच कराने पर अपनी सहमति दे दी.

आरोप

सरकार की विज्ञप्ति के अनुसार,'मुख्यमंत्री की ओर से सीबीआई से यह भी आशा की गयी है कि सीबीआई इस सम्पूर्ण प्रकरण में निष्पक्ष रूप से जांच करके सच को जल्दी ही उजागर करेगी और यदि डा सचान की हत्या की गई है तो वास्तविक दोषियों के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही करेगी.’

याद दिला दें कि हाईकोर्ट में राज्य सरकर का रुख़ देखते हुए डा.सचान के परिवार ने सीबीआई जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक अलग याचिका दायर की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से होनी चाहिए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि पहले हाईकोर्ट अपना आदेश दे दे , उसके बाद ही वह विचार करेगा.

परिवार का कहना है कि उसे उत्तर प्रदेश पुलिस पर भरोसा नही है.

परिवार के अनुसार पुलिस ने डाक्टर सचान को पहले ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत परिवार कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार के मामले में फंसाया.

फिर सी एम ओ डा. बी पी सिंह और डा. विनोद आर्य की हत्या के षड्यंत्र में भी मुलजिम बना दिया . इसके बाद जेल अस्पताल में उनकी हत्या हो गई , जिसे सरकार आत्महत्या बताने पर आमादा थी.

परिवार का आरोप है कि कुछ बड़े लोगों को बचाने के लिए डा. सचान की सुनियोजित हत्या की गई.

हत्या

ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम में पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश को केंद्र से लगभग नौ हजार करोड़ रूपये मिले हैं.

इसी वजह से उत्तर प्रदेश सरकार ने ज़िलों में सी एम ओ परिवार कल्याण सरकार का अलग पद बनाया.

इस पद पर पहले डा. विनोद आर्य और फिर डा. बी पी सिंह तैनात हुए. संयोग से दोनों की एक ही तरीके से हत्या की गई. डा. सचान उनके अधीन थे.

डा. बी पी सिंह की हत्या के बाद सरकार ने माना कि परिवार कल्याण विभाग में भारी पैमाने पर ग़बन और भ्रष्टाचार हुआ.

विभाग में हुए गंभीर घोटालों की जिम्मेदारी लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्र और परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने इस्तीफा दे दिया था.

लेकिन विपक्षी दल इससे संतुष्ट नहीं हुए. उनका आरोप है कि घोटाले का धन ऊपर मुख्यमंत्री तक जाता था.

इसीलिए विपक्ष इससे पहले दोनों सी एम ओ की हत्या के मामले में भी सीबीआई जांच पर जोर दे रहा है.

मांग

डा. बी पी सिंह और डा. विनोद आर्य के परिवार वालों ने भी अपनी मांग दोहराई है कि वे दोनों हत्याकांड भी सी बी आई को सौंप दिए जाएँ.

पर सरकार इन मामलों की सी बी आई जांच रोकने में पूरा जोर लगा रही है.

इसी के चलते पुलिस ने डा. बी पी सिंह की हत्या के लिए स्वर्गीय डा. सचान और तीन अन्य लोगों को ज़िम्मेदार बताते हुए अदालत में चार्जशीट दाख़िल कर दी ताकि यह कहा जा सके कि मामला खुल गया है.

जानकारों का मानना है कि सीबीआई जांच में दोनो सी एम ओ की हत्या और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में हुए कई हज़ार करोड़ के घपले में सत्ता में ऊपर बैठे कई लोग फंस सकते हैं. इसीलिए उत्तर प्रदेश सरकार इन मामलों को अपने ही नियंत्रण में रखना चाहती है.

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