वेश्याओं की मदद के लिए रियैलिटी शो

ज़ैम्बिया में एक वेश्या

ज़ैम्बिया की राजधानी लुसाका में इस कार्यक्रम को लेकर मिली जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है.

ज़ाम्बिया में एक ऐसा रियैलिटी शो शुरू हुआ है जिसमें वेश्याओं को पति ढूंढने में मदद की जाती है.

इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रही 18 वेश्याओं में से विजेता को नौ हज़ार डॉलर का इनाम मिलेगा और उनकी शादी का ख़र्च भी टीवी चैनल उठाएगा.

मूवी टीवी नाम के इस चैनल का कहना है कि वो वेश्याओं को उनकी ज़िंदगी नए सिरे से जीने का एक मौक़ा देना चाहते हैं.

चैनक की प्रवक्ता कोरीना पौलीना ने कहा, “हम इनकी ज़िदगी में बदलाव लाना चाहते हैं. आख़िर वैश्याएं भी इंसान हैं.”

बीबीसी की मुटुंडा चंदा का कहना है कि इस कार्यक्रम को लेकर देश में कोई विवाद नहीं पैदा हुआ है. यहां तक कि एक स्थानीय धर्मगुरू जैफ़ मुसोंडा ने इस कार्यक्रम को अपना समर्थन दिया है.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, “अगर इस कार्यक्रम के ज़रिए वेश्याओं की ज़िंदगी बेहतर हो जाती है, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं. लेकिन हां, अगर इसका मक़सद लोगों को अपने चैनल की ओर खींचना है, तो मुझे थोड़ा संदेह है.”

मूवी टीवी का कहना है कि उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए देश के विभिन्न भागों से वेश्याओं को ढूंढा.

कुछ प्रतियोगियों का कहना है कि उन्होंने वेश्यावृत्ति में क़दम इसलिए रखा, ताकि वे अपने बच्चों का पेट पाल सकें.

ये सभी प्रतियोगी शादीशुदा नहीं हैं.

मिली जुली प्रतिक्रिया

एक प्रतियोगी ने कहा, “मुझे देह व्यापार को चुनना पड़ा क्योंकि मेरे बच्चों के पिता ने मुझे अपनाने से इनकार कर दिया.”

मूवी टीवी ने घोषणा की है कि जिन प्रतियोगियों को दर्शकों के सबसे ज़्यादा वोट मिलेंगें, उन्हें इनाम के अलावा नौकरी भी दी जाएगी ताकि वो फिर से वेश्यावृति की तरफ़ न चली जाएं.

ज़ाम्बिया की राजधानी लुसाका में इस कार्यक्रम को लेकर मिली जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है.

एक दर्शक हंफरी बांडा का कहना था, “वेश्या हमेशा वेश्या ही रहेगीं. उन्हें रातों रात बदल देना आसान नहीं होता.”

दूसरी ओर प्रिस्का चिसेंगा का कहना था कि वेश्याओं के अतीत के आधार पर उनके बारे में अवधारणा नहीं बनाना चाहिए.

ज़ाम्बिया में पांच साल पहले जब पहले रियैलिटी शो की शुरुआत हुई थी, तब काफ़ी बवाल मचा था क्योंकि लोगों का कहना था कि ऐसे कार्यक्रमों से लोगों के नैतिक मूल्यों पर नकारात्मक असर पड़ेगा.

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