इतिहास के पन्नों से

17 जुलाई का दिन इतिहास के पन्नों में कई कारणों से दर्ज है.

1974 लंदन टॉवर में बम धमाका

Image caption धमाके के समय काफी तादाद मे देशी और विदेशी पर्यटकों थे.

17 जुलाई के दिन लंदन टॉवर में बम धमाका हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 41 घायल हुए थे.

व्हाइट टॉवर में जिस समय ये धमाका हुआ था उस समय तहख़ाने में स्थित छोटा प्रदर्शनी हॉल देशी और विदेशी पर्यटकों से खचाखच भरा हुआ था.

धमाके में कुछ लोग बुरी तरह घायल हुए.कम से कम आठ बच्चे भी इसकी चपेट में आए थे. घटनास्थल से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक टाइमर के हिस्से बरामद किये गए.

टावर के सुरक्षाकर्मी का कहना था कि उन्हें घटना से एक हफ्ते पहले एक संदेश मिला था कि टॉवर को उड़ा दिया जाएगा.

घटना के दो दिन बाद लंदन टॉवर को फिर से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया था लेकिन व्हाइट टॉवर को आगे की जाँच के लिए बंद ही रहने दिया गया.

हालांकि शक आईआरए पर किया गया था लेकिन न तो किसी संगठन ने इस धमाके की ज़िम्मेदारी ली और न ही कोई दोषी पाया गया.

1976 अफ़्रीकी देशों का ओलम्पिक खेलों से बहिष्कार

Image caption 21वें ओलम्पिक खेलों के उदघाटन समारोह में 25 अफ्रीकी देशों ने बहिष्कार किया.

मान्ट्रियल में हुए 21वें ओलम्पिक खेलों के उदघाटन समारोह में 25 अफ्रीकी देशों ने खेलों का बहिष्कार कर दिया था.

ये सारे देश न्यूज़ीलैड़ के दक्षिण अफ्रीका के साथ खेल-कूद संबंधों का विरोध कर रहे थे.

अफ्रीकी देश चाहते थे कि अंतरराष्ट्रीय ओलम्पिक समिति न्यूज़ीलैड़ पर प्रतिबंध लगा दे, पर ओलम्पिक समिति ने ऐसा करने से मना कर दिया था.

दक्षिण अफ्रीका पर 1964 से ही रंगभेद नीति के कारण ओलम्पिक में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध लगा लगा दिया गया था.

न्यूज़ीलैड़ की ओलम्पिक समिति के प्रवक्ता का कहना था कि दक्षिण अफ्रीका के लिए जितने भी दौरे हुए उन सबका आयोजन न्यूज़ीलैड़ रग्बी संघ ने किया था. ये एक स्वायत्तशासी संस्था है और उसका ओलम्पिक से कोई लेना देना नही है.

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