चाँद पर पहुँचने की पहली कोशिश

अंतरिक्षयात्री

आज के दिन यानी 16 जुलाई, 1969 को पहली बार इंसान को चाँद पर पहुँचाने की कोशिश की गई.

अमरीका के फ़्लोरिडा प्रांत के कैप कैनेडी स्टेशन से अपोलो 11 अंतरिक्ष की ओर रवाना हुआ.

यान को ले जाने वाले रॉकेट को देखने के लिए पूरे राज्य से दस लाख लोग इकट्ठा हुए थे.

रॉकेट छोड़े जाने से पाँच सेकेंड पहले इंजिन चालू किया गया और ठीक वक़्त पर एक तेज़ धमाके के साथ अपोलो 11 आकाश की ओर रवाना हो गया.

सिर्फ़ बारह मिनट के भीतर अपोलो 11 पृथ्वी की कक्षा में चक्कर काटने लगा. उसमें सवार थे नील आर्मस्ट्राँग, माइकल कॉलिन्स, और एडविन एलड्रिन.

धरती छोड़ने के दो घंटे और 44 मिनट बाद तीसरे चरण का बूस्टर इंजिन चालू किया गया और यान 39,500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार पकड़ते हुए पृथ्वी की कक्षा से छिटक कर चाँद की ओर रवाना हुआ.

21 जुलाई, 1969 को नील आर्मस्ट्राँग चंद्रमा की सतह पर क़दम रखने वाले पहले इंसान बने.

विश्वयुद्ध के बाद

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Image caption दूसरे विश्वयुद्ध के बाद विजयी देशों ने जर्मनी का भविष्य तय किया.

आपने वो प्रसिद्ध ऐतिहासिक तस्वीर ज़रूर देखी होगी जिसमें सोवियत संघ के नेता जोज़फ़ स्तालिन, अमरीकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमन और ब्रितानी प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल एक साथ बैठे नज़र आते हैं.

ये तस्वीर दूसरे विश्वयुद्द में हिटलर और जर्मनी की हार के बाद जर्मन शहर पोट्सडैम में ली गई थी.

तीनों नेता जर्मनी का भविष्य तय करने के लिए इस शहर में मिले थे.

इस बैठक का मक़सद ये तय करना भी था कि जर्मनी के कुछ उद्योगों का किस तरह ख़ात्मा किया जाए ताकि वो फिर से कहीं अपने पड़ोसी देशों के ख़िलाफ़ न उठ खड़ा हो.

हिटलर का अंत

16 जुलाई की सुबह चर्चिल और ट्रूमन ने युद्ध से तबाह हो चुके बर्लिन शहर का दौरा किया.

बर्लिन के सोवियत सैन्य गवर्नर कर्नल-जनरल गोराबोतोव ने चर्चिल और उनके साथ गए लोगों का स्वागत किया.

चर्चिल को वो जगह भी दिखाई गई जहाँ हिटलर और उनकी प्रेमिका के शवों को कथित तौर पर जला दिया गया था.

कहा जाता है कि युद्ध में हार के बाद हिटलर ने ख़ुद को गोली मार ली थी.

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