इसराइल ने ग़ाज़ा जा रही नाव को रोका

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Image caption कार्यकर्ताओं का कहना है कि नाव को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से क़ब्ज़े में लिया गया

इसराइली नौसेना ने कहा है कि उसने फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ज़ा की नाकेबंदी तोड़ने के इरादे से फ़लस्तीनी समर्थक कार्यकर्ताओं को ले जा रही एक नाव पर अपने नौसैनिक उतार दिए हैं.

इसराइली नौसेना के अनुसार नाव पर सवार लोगों ने इसराइली नौसैनिकों की इस कार्रवाई का विरोध नहीं किया और इस नाव को अब एक इसराइली बंदरगाह पर ले जाया जा गया है.

एक सैन्य प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा कि इस कार्रवाई में कोई लड़ाई नहीं हुई और इसराइली नौसैनिक शांतिपूर्ण तरीक़े से नाव पर सवार हो गए.

हालाँकि एक फ़लस्तीनी समर्थक कार्यकर्ता का कहना था कि जिस समय इसराइली नौसैनिकों ने ये कार्रवाई की उस समय नाव अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में थी.

ए फ्रेंच बोट फ़ॉर ग़ाज़ा से एक कार्यकर्ता मैक्ज़िम गिम्बर्टियू का कहना था, “डिगनाइट अल करेमे पर सवार कार्यकर्ताओं ने उन्हें बताया कि जब उस नाव को चार इसराइली नौसैनिक जहाज़ों ने घेरा तो नाव ग़ाज़ा तट से 40 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में थी. बस उसी समय नाव पर सवार कार्यकर्ताओं के साथ उनका संपर्क टूट गया.”

नाव पर इसराइली नौसैनिकों के सवार होने पर प्रतिक्रिया देते हुए फ्रांस स्थित एक फ़लस्तीनी समर्थक गुट प्लेटफॉर्म फ़लस्तीन ने समाचार एजेंसी एपी से कहा कि ये कार्रवाई “इसराइली राजनीति का सैनिक तर्क दिखाती है जो सिर्फ़ ताक़त की ही भाषा बोलती है.”

प्लेटफ़ॉर्म फ़लस्तीन का ये भी कहना था कि उस नाव पर सवार किसी भी कार्यकर्ता से अब उनका कोई संपर्क नहीं बचा है.

एपी ने ख़बर दी है कि ग़ाज़ा में सत्तारूढ़ हमास सरकार ने भी इसराइली कार्रवाई की निंदा की है.

उधर इसराइली सेना के एक वक्तव्य में कहा गया है कि तमाम कूटनीतिक तरीक़े अपनाने के बाद ही नाव पर इसराइली नौसैनिक सवार हुए हैं. वक्तव्य में ये भी कहा गया है कि उससे पहले नाव को कई बार वापिस जाने को कहा गया लेकिन इस चेतावनी को नज़रअंदाज़ कर दिया गया था.

ग़ाज़ा की इसराइली नाकेबंदी तोड़ने की इस ताज़ा गतिविधि से लगभग एक वर्ष पहले भी इसी तरह की कोशिश की गई थी.

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Image caption इस बार फ़लस्तीनियों को सहायता ग़ाज़ा पहुँचने की कम ही उम्मीद थी

सहायता सामग्री से भरे अनेक जहाज़ उस बेड़े में ग़ज़ा की तरफ़ जा रहे थे जिस पर इसराइली कमांडो ने हमला कर दिया था.

उस हमले में नौ तुर्की कार्यकर्ता मारे गए थे. उस घटना को देखते हुए इस बार ग़ाज़ा में रहने वाले बहुत ही कम लोगों ने ये उम्मीद की थी कि डिगनाइट अल करामा नामक ये नाव इस वर्ष अपनी इस कोशिश में कामयाब होते हुए यहाँ तक पहुँच जाएगी.

सिर्फ़ एक नाव

इस नाव पर लगभग दस फ़लस्तीनी समर्थक कार्यकर्ता, चालक दल के सदस्य और कुछ पत्रकार सवार हैं जो दुनिया के अनेक हिस्सों से एकत्र हुए.

मूल रूप से एक बड़ा जहाज़ी बेड़ा पिछले साल की ही तरह से सहायता सामग्री लेकर ग़ाज़ा की तरफ़ चला था लेकिन ज़्यादातर नावों को ग्रीस में ही रोक दिया गया ताकि पिछले साल जैसी घटना फिर से ना हो जाए.

इसराइली नौसेना ने इस नाव को भी वापिस जाने को कहा लेकिन कार्यकर्ताओं के इनकार करने पर उसे नौसेना ने अपने क़ब्ज़े में ले लिया जिस पर कुछ नौसैनिक सवार होकर इसे इसराइली बंदरगाह की तरफ़ ले गए हैं.

इसराइली नौसैनिकों ने नाव पर सवार होने से पहले ये पूछा कि ये नाव कहाँ से चली है और उसकी मंज़िल क्या है. और ये भी कि क्या ये कोई मालवाहक नाव है तो बताया गया कि ये निजी क्रूज़र नाव है जिसकी मंज़िल ग़ाज़ा बंदरगाह है.

इसराइल हमेशा ही ये कहता रहा है कि वो इस नाव को रोक देगा. लेकिन नाव पर सवार फ़लस्तीनी समर्थक कार्यकर्ता भी अपने इरादे में पक्के नज़र आए कि वो ग़ाज़ा की इसराइली नाकेबंदी तोड़कर ही रहेंगे.

इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसराइल ने ग़ाज़ा की जो नाकेबंदी कर रखी है वो ग़ैर क़ानूनी है.

उधर इसराइल का कहना है कि उसे ये चिंता है कि इस तरह की गतिविधियों के ज़रिए ग़ाज़ा में हथियार भेजे जा सकते हैं जहाँ हमास की सरकार है.

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