लश्कर गाह अब अफ़ग़ान सेना के हवाले

Image caption लश्कर गाह की सुरक्षा को लेकर अफ़गान सेना की क्षमता पर सवाल उठाए जा रहे हैं

अफ़ग़ानिस्तान के अस्थिर हेलमंद प्रांत में तैनात ब्रितानी सेना ने लश्कर गाह शहर का नियंत्रण अफ़ग़ान सुरक्षा बलों को सौंप दिया है.

नैटो ने पहले ही अपेक्षाकृत ज़्यादा शांत माने जाने वाले बामियान प्रांत और पूर्वी शहर मेहतर लाम की सुरक्षा व्यवस्था की ज़िम्मेदारी अफ़ग़ान सेना को सौंप दी है.

लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि लश्कर गाह में स्थिरता बनाए रखना स्थानीय सेना के लिए बहुत कड़ी परीक्षा होगी.

अफ़ग़ानिस्तान में तैनात विदेशी सेना को 2014 तक सुरक्षा और लड़ाई की कमान अफ़ग़ान सेना को सौंप देनी है. सैनिक ज़िम्मेदारियों के हस्तांतरण को इस दिशा में उठाए गए अहम क़दम के रूप में देखा जा रहा है.

नैटो ने पूर्वी लग़मान प्रांत की राजधानी महातरलाम की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अफ़ग़ान सुरक्षा बलों को मंगलवार को सौंपी थी.

महातरलाम तुलनात्मक रूप से सुरक्षित शहर माना जाता है लेकिन हस्तांतरण समारोह के दौरान शहर के नज़दीक मोर्टार हमले की ख़बरें आई थीं.

इसी साल मार्च में राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने सात इलाक़ों का सैनिक नियंत्रण अफ़ग़ान सुरक्षा बलों को सौंपे जाने का एलान किया था. बाक़ी बचे चार इलाके हैं, काबुल प्रांत, पंजशीर प्रांत, हेरात शहर, मज़ार ए शरीफ़ शहर.

पर्यवेक्षकों का कहना है कि हेलमंद प्रांत की राजधानी लश्कर गाह में अफ़ग़ान सुरक्षा बलों को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है जहां तालिबान चरमपंथी अभी भी सक्रिय हैं.

सोमवार को लश्कर गाह शहर के बाहरी इलाक़े में एक सुरक्षा चौकी पर तैनात सात पुलिसकर्मी मारे गए थे.

शनिवार को इलाक़े में गश्त लगा रहे एक ब्रितानी सैनिक की हत्या कर दी गई थी. ख़बरों के मुताबिक़ अफ़ग़ान सेना की वर्दी पहने एक व्यक्ति ने उन्हें गोली मार दी थी.

'काफ़ी काम बाक़ी'

नैटो के अंतर्गत तक़रीबन दस हज़ार ब्रितानी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में काम कर रहे हैं, उनमें से ज़्यादातर हेलमंद में तैनात हैं.

वर्ष 2014 के अंत तक अफ़ग़ानिस्तान में तैनात ब्रितानी सैनिकों को हटा लिया जाना है. लेकिन कुछ दिन पहले ही ब्रिटेन के सांसदों ने इस लक्ष्य की ये कहते हुए निंदा की थी कि अफ़ग़ानिस्तान से सैनिकों को हटाने से वहां बचे सैनिकों की सुरक्षा ख़तरे में पड़ सकती है.

संसद की रक्षा समिति ने भी कहा था कि वर्ष 2014 के अंत तक सैनिकों को वापस बुलाने की योजना अंतरराष्ट्रीय सेना की रणनीति को कमज़ोर कर सकती है.

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री लियाम फ़ॉक्स ने कहा है, ''अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है लेकिन सैन्य वापसी का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.''

संवाददाताओं का कहना है कि चरमपंथी हमले के शिकार लोगों की बढ़ती संख्या के बावजूद अतिरिक्त अमरीकी सैनिकों और दसियों हज़ार नए अफ़ग़ान सुरक्षाबलों की वजह से अफ़ग़ानिस्तान के कई इलाक़ों में सुरक्षा के हालात सुधरे हैं.

हालांकि अफ़ग़ान पुलिसकर्मियों और सैनिकों की गुणवत्ता कमतर आंकी जाती है और ये भी आशंका जताई जा रही है कि गर्मियों में तालिबान के नए हमलों का वो शायद ही मुक़ाबला कर पाएंगे.

हेलमंद की सुरक्षा को लेकर ऐसी आशंकाएं सबसे ज़्यादा हैं क्योंकि अफ़ग़ान पुलिस को सैन्य हस्तांतरण में मुख्य भूमिका निभानी है. लेकिन अफ़ग़ान पुलिस में व्याप्त भ्रष्टाचार और इसके अधिकारियों के गिरे हुए मनोबल को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है.

बड़े हमले

Image caption लश्कर गाह दक्षिणी हेलमंद प्रांत की राजधानी है

राष्ट्रपति करज़ई की घोषणा के बाद से ही पूरे अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा तेज़ी से बढ़ी है.

सैन्य हस्तांतरण वाले इलाक़ों के ऐलान के कुछ ही हफ़्तों के भीतर मज़ार ए शरीफ़ में एक प्रदर्शन के दौरान संयुक्त राष्ट्र के सात कर्मचारी मारे गए थे.

मज़ार ए शरीफ़ की सुरक्षा भी अफ़ग़ान सैनिकों को सौंपी जानी है.

करज़ई के एलान के बाद देश में कई बड़े हमले भी हुए हैं. इसमें काबुल के एक होटल में हुआ हमला भी शामिल है जिसमें 22 लोग मारे गए थे.

बामियान की सुरक्षा की ज़िम्मदारी अफ़ग़ान सैनिकों को सौंपे जाने के समारोह के कुछ ही घंटे के भीतर चरमपंथियों ने राष्ट्रपति के एक प्रमुख सहयोगी के काबुल स्थित घर हमला कर उनकी हत्या कर दी थी.

हस्तांतरण की आरंभिक घोषणा के समय नैटो के महासचिव एंडर्स फ़ॉग रासमुसेन ने कहा था कि सैनिक ज़िम्मेदारी के हस्तांतरण का हर क़दम ज़मीनी हक़ीक़त को ध्यान में रखते हुए उठाया जाएगा.

अफ़ग़ानिस्तान की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी स्थानीय लोगों को सौंपने के बाद विदेशी सेना अफ़ग़ान सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देने का काम करेगी.

अफ़ग़ानिस्तान में इस वक़्त क़रीब एक लाख 40 हज़ार विदेशी सैनिक तैनात हैं जिनमें से एक लाख अमरीकी सैनिक हैं जो तालिबान चरमपंथ का मुक़ाबला कर रहे हैं.

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