इतिहास के पन्नों से

इतिहास में 26 जुलाई की तारीख़ कई घटनाओं की वजह से महत्वपूर्ण है. एशिया और यूरोप को जोड़ने वाली स्वेज़ नहर का 26 जुलाई 1956 को राष्ट्रीयकरण किया गया. ब्रिटेन के आम चुनाव में चर्चिल की हार हुई और लेबर पार्टी के क्लीमेंट एटली नए प्रधानमंत्री चुने गए.

1956: मिस्र ने स्वेज़ नहर पर कब्ज़ा किया

Image caption स्वेज़ नहर पर अक्टूबर 1956 में ब्रितानी, फ़्रांसीसी और इस्राइली सेना ने हमला किया था

26 जुलाई 1956 को मिस्र के राष्ट्रपति कर्नल जमाल अब्दुल नासिर ने स्वेज़ नहर कंपनी के राष्ट्रीयकरण की घोषणा कर दी थी ताकि आसवान बांध के निर्माण के लिए कोष की व्यवस्था की जा सके.

राष्ट्रपति की इस घोषणा पर स्वेज़ नहर कंपनी में भागीदारी रखने वाली ब्रिटेन की सरकार और फ़्रांस के निवेशकों को काफ़ी आघात पहुंचा था.

राष्ट्रपति नासिर ने एलेक्ज़ेंड्रिया में भारी जनसमूह के बीच दिए ढाई घंटे के भाषण में कहा कि राष्ट्रीयकरण क़ानून को पहले ही सरकारी गजट में प्रकाशित कर दिया गया है.

उन्होंने कहा कि कंपनी की मिस्र में जो भी संपत्ति है उसे सरकार ने रोक लिया है और सभी शेयरधारकों को पेरिस स्टॉक एक्सचेंज में 26 जुलाई के अंतिम सूचकांक के आधार पर क़ीमत अदा की जाएगी.

स्वेज़ नहर विश्व व्यापार के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग था और ब्रिटेन की सरकार को इससे काफ़ी राजस्व मिलता था.

इस जलमार्ग की व्यवस्था देखने वाली स्वेज़ नहर कंपनी क़ानूनन मिस्र की थी लेकिन 1869 में इसे 99 वर्ष के लिए पट्टे पर दे दिया गया था.

1945: चर्चिल आम चुनाव हार गए

Image caption लेबर पार्टी ने ऐसी ज़ोरदार जीत की उम्मीद नहीं की थी

26 जुलाई 1945 को ब्रितानी आम चुनाव में मिली भारी जीत के बाद लेबर पार्टी के क्लीमेंट एटली ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री चुने गए.

निवर्तमान प्रधानमंत्री और द्वितीय विश्वयुद्ध के महान नेता रहे विंस्टन चर्चिल ने तुरंत अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

आम चुनाव में लेबर पार्टी की भारी जीत कंज़रवेटिव पार्टी के लिए एक बड़ा धक्का थी क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री चर्चिल ने गठबंधन सेना को बेहद क़ामयाब नेतृत्व प्रदान किया था.

संबंधित समाचार