अमरीका में हत्यारे को सज़ा-ए-मौत

मार्क स्ट्रोमैन

अमरीका में 11 सितंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमलों के बाद नफ़रत के चलते हत्याएं करने वाले मार्क स्ट्रोमैन को अमरीकी राज्य टैक्सस में मौत की सज़ा दे दी गई है.

स्ट्रोमैन ने उन दो लोगों की हत्या की थी जिन्हें उसने अरब मूल का नागरिक समझा था.

स्ट्रोमैन ने अपराध क़बूल करते हुए कहा था कि 9/11 को हुई घटना का बदला लेने के लिए उन्होंने मुसलमान या जो लोग उनके जैसे दिखते हैं, उनकी हत्याएं की. मार्क स्ट्रोमैन को ज़हरीला इंजेक्शन दे कर मौत की नींद दी गई.

हालांकि इस मामले में 41 वर्षीय स्ट्रोमैन के वकील आख़िरी वक्त तक अमरीकी सुप्रीम कोर्ट में जिरह करते रहे.

अपने अंतिम हफ़्तों में स्ट्रोमैन की दया याचिका का समर्थन रायस भूइयान ने किया, जिस पर स्ट्रोमैन ने ही गोली चलाई थी लेकिन वह बच गए थे.

समाधान नहीं

भूइयान का कहना था कि स्ट्रोमैन को मारना इस समस्या का समाधान नहीं है

मौत से पहले स्ट्रोमैन का कहना था, "मैं अपनी मौत से चंद सेकेंड दूर हूँ लेकिन मैं पूरी तरह से शांतचित्त हूँ. "

उन्होंने अमरीका को अंतिम विदाई संदेश में कहा, "भगवान अमरीका और सबको सलामत रखे."

स्ट्रोमैन की मौत से पहले बीबीसी से बात करते हुए भूइयान का कहना था, "स्ट्रोमैन ने नफ़रत के कारण ये अपराध किए थे साथ ही उन्होंने ये चेतावनी दी कि इस मौत से कुछ हासिल नहीं होगा."

स्ट्रोमैन की मौत के बाद टैक्सस में इस तरह से दी जाने वाली सज़ा-ए- मौत की संख्या आठ हो गई है.

संबंधित समाचार