इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्ने पलटें तो 23 जुलाई का दिन कई वजहों से याद किया जाएगा. वर्ष 2005 में इस दिन मिस्र में हुए बम धमाकों में 88 लोगों की मौत हो गई और वर्ष 1974 में ग्रीस में सैन्य शासन ख़त्म हुआ.

2005: मिस्र में बम धमाकों में 88 की मौत

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Image caption शर्म-अल-शेख़ के गज़ाला गार्डन्स होटल में धमाकों के बाद का मंज़र.

23 जुलाई 2005 को मिस्र के शर्म-अल-शेख़ के रिज़ॉर्ट में हुए बम धमाकों में 88 लोग मारे गए थे.

रात में हुए इन धमाकों में क़रीब 200 लोग घायल भी हुए थे. कुल तीन धमाके हुए थे, इनमें पहला पुराने बाज़ार में हुआ और बाक़ि दो एक रिज़ॉर्ट में हुए थे.

मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने इन्हें मिस्र के इतिहास का सबसे बड़ा हमला बताया.

उन्होंने धमाकों वाले इलाकों का दौरा किया और 'आतंकवाद के ख़िलाफ अपनी लड़ाई' को जारी रखने की मंशा दोहराई.

मारे गए लोगों में ज़्यादातर मिस्र के रहनेवाले थे, हालांकि कम से कम 20 विदेशी नागरिकों के भी मारे जाने की आशंका थी.

1974: ग्रीस में सैन्य शासन ख़त्म

Image caption ब्रितानी प्रधानमंत्री हैरल्ड विल्सन से बातचीत करते हुए कौन्सटैनटिन कारमनालिस.

1974 में ग्रीस का सैन्य शासन ख़त्म हो गया और पूर्व प्रधानमंत्री कौन्सटैनटिन कारमनालिस को दोबारा सत्ता संभालने का न्यौता दिया गया.

23 जुलाई 1974 को उनके स्वागत में राजधानी एथेन्स के हवाई अड्डे पर भारी भीड़ जुटी और पूरे शहर में जश्न का माहौल रहा.

कारमनालिस, 1957 से 1963 तक आठ साल तक ग्रीस के प्रधानमंत्री रह चुके थे. ग़ौरतलब है कि 1960 में ग्रीस को ब्रिटेन से आज़ादी मिली थी.

1963 में आखिरी बार लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव हुए, जिनमें उनकी पार्टी हार गई और अप्रैल 1967 से ग्रीस में सेना ने सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया.

लेकिन 1974 में साइप्रस पर उठे संकट के चलते सैन्य शासन चरमरा गया.

पहले ग्रीस ने साइप्रस पर कब्ज़ा किया और फिर तुर्की ने उसे हटाकर साइप्रस पर हमला कर दिया.

इसके बाद 1974 में एक जनमत संग्रह किया गया जिसमें जनता ने राजशाही के ख़िलाफ और राष्ट्रपति शासन के हक़ में फैसला किया.

आखिरकार कौन्सटैनटिन कारमनालिस ने 1977 में 'न्यू डेमोक्रेसी पार्टी' बनाई और फिर ग्रीस के प्रधानमंत्री चुने गए.

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