ईरान का गैस पाइपलाइन समझौता

ईरान का परमाणु संयंत्र इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वजह से उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं

ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा है कि सीरिया, ईरान और इराक़ ने एक ऐसी पाइप लाइन बनाने का समझौता किया है, जिसके तहत ईरानी गैस की आपूर्ति यूरोपीय देशों को की जाएगी.

पाँच हज़ार किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन के ज़रिए हर दिन 11 करोड़ क्यूबिक मीटर ईरानी गैस इराक़ से होते हुए सीरिया और लेबनान के ज़रिए यूरोपीय देशों को पहुँचाई जा सकेगी.

ख़बरों में कहा गया है कि इस परियोजना पर दस अरब डॉलर की लागत आएगी. गैस पाइप बनाने के इस समझौते पर इराक़, सीरिया के तेल मंत्रियों और ईरानी तेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने हस्ताक्षर किए हैं.

अभी ये स्पष्ट नहीं है कि सीरिया में जो सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं, क्या उनका कोई असर इस परियोजना पर पड़ेगा या नहीं.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से ईरान का ऊर्जा सेक्टर प्रतिकूल प्रभाव में है और इस परियोजना को ईरानी ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक नई ऊर्जा मिलने के तौर पर देखा जा रहा है.

फ़ायदा

सीरिया के पास ईरान और इराक़ जैसे तेल और गैस संसाधन नहीं हैं और ये दोनों ओपेक संगठन के सदस्य हैं. इस गैस पाइपलाइन के ज़रिए सीरिया को भी निश्चित रूप से फ़ायदा होगा.

ईरान के तेल उप मंत्री जवाद औवजी के हवाले से सरकारी टेलीविज़न ने ख़बर दी है कि ये गैस पाइप लाइन बनाने में तीन से पाँच वर्ष का समय लग सकता है.

समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद अब इसके निर्माण के लिए ठेकेदारों और धन निवेशकों की तलाश की जाएगी.

जवाद औवजी ने बताया कि ईरान के जिस इलाक़े से ये गैस आपूर्ति शुरू की जाएगी वहाँ हर दिन 25 करोड़ क्यूबिक मीटर की दर से 80 साल तक आपूर्ति करने लायक भंडार मौजूद हैं.

ईरान पर इसके परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं जिनकी वजह से बहुत सी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियाँ इस तरह के समझौतों से दूर रही हैं.

ईरान तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है और इसके पास 137 अरब बैरल कच्चे तेल के भंडार मौजूद हैं.

ईरान के पास प्राकृतिक गैस के दुनिया के सबसे बड़े भंडार हैं जो अनुमानों के अनुसार 28 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर तक हैं.

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