नार्वे के हमलावर का हिंदुत्व 'प्रेम'

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Image caption हमलों के लिए ग़िरफ़्तार एंडर्स बेरिंग ब्रेविक बहुसंस्कृतिवाद के विरोधी हैं.

नार्वे में हुए जनसंहार के लिए 'ज़िम्मेदार' माने जा रहे एंडर्स बेरिंग ब्रेविक भारत में हिंदुत्व का परचम बुलंद करने वालों को दुनिया की जनतांत्रिक व्यवस्थाओं के तख़्ता पलट की अपनी लड़ाई का अहम साझीदार मानते हैं.

अपने घोषणा पत्र में एंडर्स बेरिंग ब्रेविक ने कहा है कि वो भारत से मुसलमानों को खदेड़ने में हिंदुत्वादी तत्वों की सामरिक मदद करेंगे.

पंद्रह सौ पन्नों के घोषणा पत्र में ब्रेविक ने बताया है कि किस तरह 'सांस्कृतिक मार्क्सवादी' व्यवस्था (जिसमें विभिन्न नस्लों के लोग बग़ैर किसी भेदभाव के मिलकर रहें या मल्टी कल्चरलिज़्म) को समाप्त करने के लिए वो एक मुहिम शुरू करना चाहते हैं जो आतंकवादी गतिविधियों से शुरू होकर एक वैश्विक युद्ध में बदल जाती जिसमें व्यापक विनाश के हथियारों का भी इस्तेमाल किया जाता.

भारत के अंग्रेज़ी समाचारपत्र 'द हिंदू' ने इस घोषणा पत्र पर एक लेख छापा है जिसमें कहा गया है कि इस घोषणा पत्र के 102 पन्नों में भारत का ज़िक्र किया गया है.

'मुसलमानों-ईसाइयों का तुष्टीकरण'

ब्रेविक कहते हैं कि उनका 'जसटिसियार नाईट्स' "सनातन धर्म आंदोलन और भारतीय राष्ट्रवादियों का समर्थन करता है."

घोषणा पत्र के एक हिस्से में व्याख्या करते हुए 70 से अधिक लोगों की मौत का आरोप झेल रहे ब्रेविक कहते हैं कि हिंदू राष्ट्रवादियों को "भारतीय सांस्कृतिक मार्क्सवादियों की ओर से उसी तरह के उत्पीड़न सहन करने पड़ रहे हैं जैसा उनके यूरोपीय भाईयों के साथ हो रहा है."

ब्रेविक को एक कट्टरपंथी ईसाई बताया जा रहा है जो मुसलमानों से नफ़रत करते हैं.

भारत के केंद्र में मौजूद वर्तमान संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के बारे में उनकी राय है कि वह "मुसलमानों के तुष्टीकरण में यक़ीन रखती है और बहुत दुख की बात है कि वो उन ईसाई मिशनरियों को ख़ुश रखना चाहती है जो ग़ैर-क़ानूनी तौर पर झूठ और डर का सहारा लेकर नीची जाति के हिंदुओं का धर्मांतरण करवाते हैं."

ब्रेविक का घोषणा पत्र उन हिंदू गुटों की तारीफ़ करता है जो "इस तरह की नाइंसाफ़ियों को बर्दाश्त नहीं करते और जब हालात क़ाबू से बाहर हो जाते हैं तो मुसलमानों पर हमले करते हैं."

लेकिन साथ ही वो कहते हैं कि इस तरह के आचरण से फ़ायदे की बजाए नुकसान होता है.

"मुसलमानों पर हमले करने की बजाए उन्हें ग़द्दारों को निशाना बनाना चाहिए, और अपनी जंगी क्षमताओं को बढ़ाना चाहिए" ताकि सांस्कृतिक मार्क्सवादी सरकार का तख़्ता पलट किया जा सके.

"ये ज़रूरी है कि यूरोपीय और भारतीय विरोधी समूह एक दूसरे से सबक़ लें और जितना संभव हो एक दूसरे का सहयोग करें" क्योंकि "हमारे उद्देश्य लगभग समान हैं."

पदक

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Image caption शुक्रवार को हुए हमलों के बाद नार्वे में शोक का माहौल है.

'द हिंदू' में छपे लेख के अनुसार अधिक जानकारी के लिए ब्रेविक ने भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों के वेबसाइटों के पते भी मुहैया करवाए हैं.

ब्रेविक को उम्मीद है कि चीन, रूस, थाईलैंड और फिलीपींस जैसे देशों में उनके विचारों से समानता रखने वाले इस जद्दोजहद को जारी रखेंगे.

इस्लाम से यूरोप को पैदा होने वाले ख़तरों पर ध्यान दिलाने के लिए वो भारतीय इतिहासकारों केएस लाल और श्रीनंदन व्यास के कार्यों का हवाला देते हैं कि किस तरह साल 1000 से 1525 के दौरान लाखों हिंदुओं का क़त्लेआम हुआ था.

ब्रेविक के घोषणा पत्र में पदकों का भी ज़िक्र है जिनमें से एक 'लिबरेशन ऑफ़ इंडिया सर्विस मेडल' उन लोगों को देने की बात थी "जो इस्लाम को भारत से खदेड़ने में सहायता करेंगे."

ब्रेविक ने लड़ाई के लिए इस तरह के पदकों में से पहला भारतीय शहर बनारस से बनवाया था.

लेकिन ब्रेविक जो हिंदुत्ववादियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस्लाम के ख़िलाफ़ जंग छेड़ने की बात करते हैं 'मिशन' पूरा हो जाने के बाद उनके साथ क्या सलूक करना चाहते हैं?

उनकी सोच है कि इंक़लाब पूरा हो जाने के बाद यूरोप में एक "दास समूह" का गठन किया जाएगा जिसमें भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान के ग़ैर-मुस्लिम शामिल होंगे.

यूरोप में अपने प्रवास के दौरान वो बारह घंटे काम करेंगे, वो हर बड़े शहर के बाहर अलग आबादियों में रहेंगे और उनके कान्ट्रेक्ट की मुद्दत छह से बारह महीने होगी जिसके बाद उन्हें उनके मुल्क वापस भेज दिया जाएगा.

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