ब्रिटेन की घोषणा से लीबिया नाराज़

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Image caption ब्रिटेन में लीबिया के दूतावास के बाहर विद्रोहियों के बच्चों ने झंडे फहराए.

लीबियाई विपक्ष को वहां की वैध सरकार मानने की ब्रिटेन की घोषणा का लीबिया ने बहिष्कार किया है.

ब्रिटेन से पहले अमरीका, फ़्रांस और कई अन्य देश लीबिया के विद्रोहियों को वहाँ की वैध सरकार के तौर पर मान्यता दे चुके हैं.

लीबिया के नेता कर्नल ग़द्दाफी की सरकार में विदेश उप मंत्री ख़ालिद कैम ने कहा है कि ये फ़ैसला अभूतपूर्व और ग़ैर-ज़िम्मेदाराना है.

उन्होंने कहा कि लीबिया इस फैसले को पलटने के लिए ब्रितानी अदालतों और अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत का दरवाज़ा खटखटाएगा.

ब्रिटेन ने अपने यहाँ कार्यरत लीबिया के सभी आठ राजनयिकों को निष्कासित करने के आदेश दे दिए हैं.

त्रिपोली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कैम ने कहा, “ये ग़ैरकानूनी है, ब्रितानी सरकार की इस पहल से हमें ताज्जुब होता है, अगर अन्य देश भी ऐसा करने लगे तो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में कोलाहल मच जाएगा.”

विद्रोही भेजेंगे राजदूत

लीबिया के विद्रोहियों ने ब्रिटेन में लीबिया के राजदूत के तौर पर, एक लेखक और पत्रकार, महमूद-अल-नाकू का नाम प्रस्तावित किया है.

नाकू ने बीबीसी को बताया कि वो गद्दाफी के शासन के मुखर विरोधी थे, इसलिए पिछले 33 साल से देश से निर्वासित थे.

नाकू ने कहा, “लीबिया की सड़कों पर सुरक्षा बलों से लड़ रहे उन साहसी नौजवानों की वजह से, मुझे यक़ीन है हम जल्द ही त्रिपोली पर कब्ज़ा कर लेंगे.”

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा कि विद्रोही लीबिया को एक लोकतांत्रिक देश के तौर पर चलाने की प्रतिबद्धता दिखा चुके हैं, जो ग़द्दाफी के निर्दयी शासन से एकदम उलट है, अब ग़द्दाफी को सत्ता में क़ाबिज़ रहने का कोई अधिकार नहीं है.

हालांकि त्रिपोली में स्थित बीबीसी संवाददाता जेम्स रेनॉल्ड्स के मुताबिक ब्रिटेन के इस कदम के बावजूद लीबिया के राजनयिक अब भी यही दावा कर रहे हैं कि लड़ाई चाहे जितनी लंबी हो, जीत ग़द्दाफी की ही होगी.

पिछले पांच महीनों से लीबिया के विद्रोहियों और 42 साल से वहां शासन कर रहे नेता मुअम्मर ग़द्दाफी की सेनाओं के बीच संघर्ष चल रहा है.

विद्रोहियों को नेटो का समर्थन हासिल है, जिन्होंने लीबिया में उड़ान रहित क्षेत्र लागू किया हुआ है.

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